Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 30 / Mantra 13

58 Sukta
24 Mantra
4/30/13
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒त शुष्ण॑स्य धृष्णु॒या प्र मृ॑क्षो अ॒भि वेद॑नम्। पुरो॒ यद॑स्य संपि॒णक् ॥१३॥

उ॒त । शुष्ण॑स्य । धृ॒ष्णु॒ऽया । प्र । मृ॒क्षः॒ । अ॒भि । वेद॑नम् । पुरः॑ । यत् । अ॒स्य॒ । स॒म्ऽपि॒णक् ॥

Mantra without Swara
उत शुष्णस्य धृष्णुया प्र मृक्षो अभि वेदनम्। पुरो यदस्य संपिणक् ॥

उत। शुष्णस्य। धृष्णुऽया। प्र। मृक्षः। अभि। वेदनम्। पुरः। यत्। अस्य। सम्ऽपिणक् ॥१३॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 21 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे राजन् ! (यत्) जिससे आप (शुष्णस्य) बलयुक्त सेना की (धृष्णुया) ढिठाई से (अस्य) इस शत्रु के (पुरः) नगरों को (प्र, मृक्षः) अच्छे प्रकार सींचो अत एव शत्रुओं को (सम्पिणक्) चूर्णित करो (उत) और भी (अभि, वेदनम्) विज्ञान को प्राप्त कराओ ॥१३॥
Essence
वही राजा सम्मत होवे कि जो सेना को बढ़ाय और अन्याय के आचरणों को दूर करके बिन कहे को अच्छा जाननेवाला होवे ॥१३॥
Subject
अब राजसम्बन्ध से मनुष्य विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥