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Rigveda Mandal 4 / Sukta 30 / Mantra 11

58 Sukta
24 Mantra
4/30/11
Devata- इन्द्रउषाश्च Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए॒तद॑स्या॒ अनः॑ शये॒ सुसं॑पिष्टं॒ विपा॒श्या। स॒सार॑ सीं परा॒वतः॑ ॥११॥

ए॒तत् । अ॒स्याः॒ । अनः॑ । श॒ये॒ । सुऽस॑म्पिष्टम् । विऽपा॑शि । आ । स॒सार॑ । सी॒म् । प॒रा॒ऽवतः॑ ॥

Mantra without Swara
एतदस्या अनः शये सुसंपिष्टं विपाश्या। ससार सीं परावतः ॥

एतत्। अस्याः। अनः। शये। सुऽसम्पिष्टम्। विऽपाशि। आ। ससार। सीम्। पराऽवतः ॥११॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 21 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! जैसे (सीम्) सूर्य्य (अस्याः) इस प्रातःकाल का (एतत्) यह (सुसम्पिष्टम्) उत्तम प्रकार एक स्थान में पीसा चूर्ण हो जिसमें उस अन्धकार को (अनः) गाड़ी के सदृश (विपाशि) बन्धनरहित मार्ग में (परावतः) दूर देश से (आ, ससार) सब प्रकार चलता है, जिसमें मैं (शये) शयन करूँ, वैसे इसको आप जानिये ॥११॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे श्रेष्ठ वाहन शीघ्र दूर जाते हैं, वैसे ही प्रातःकाल दूर जाता है, ऐसा जानना चाहिये ॥११॥
Subject
अब सूर्य्यविषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥