Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 28 / Mantra 3

58 Sukta
5 Mantra
4/28/3
Devata- इन्द्रासोमौ Rishi- वामदेवः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अह॒न्निन्द्रो॒ अद॑हद॒ग्निरि॑न्दो पु॒रा दस्यू॑न्म॒ध्यन्दि॑नाद॒भीके॑। दु॒र्गे दु॑रो॒णे क्रत्वा॒ न या॒तां पु॒रू स॒हस्रा॒ शर्वा॒ नि ब॑र्हीत् ॥३॥

अह॑न् । इन्द्रः॑ । अद॑हत् । अ॒ग्निः । इ॒न्दो॒ इति॑ । पु॒रा । दम्यू॑न् । म॒ध्यन्दि॑नात् । अ॒भीके॑ । दुः॒ऽगे । दु॒रो॒णे । क्रत्वा॑ । न । या॒ताम् । पु॒रु । स॒हस्रा॑ । शर्वा॑ । नि । ब॒र्ही॒त् ॥

Mantra without Swara
अहन्निन्द्रो अदहदग्निरिन्दो पुरा दस्यून्मध्यन्दिनादभीके। दुर्गे दुरोणे क्रत्वा न यातां पुरू सहस्रा शर्वा नि बर्हीत् ॥

अहन्। इन्द्रः। अदहत्। अग्निः। इन्दो इति। पुरा। दस्यून्। मध्यन्दिनात्। अभीके। दुःऽगे। दुरोणे। क्रत्वा। न। याताम्। पुरु। सहस्रा। शर्वा। नि। बर्हीत् ॥३॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 17 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (इन्दो) अत्यन्त ऐश्वर्य्य से युक्त प्रजाजन जो (इन्द्रः) सूर्य्य के सदृश राजा (मध्यन्दिनात्) मध्य दिन में वर्त्तमान ताप से (दस्यून्) बड़े साहस करनेवालों को (अहन्) नाश करता है (अग्निः) अग्नि के सदृश (अभीके) समीप में दुष्टों को (अदहत्) जलाता है और (पुरा) पहिले से (दुर्गे) राजगढ़ (दुरोणे) गृह में (क्रत्वा) बुद्धि वा कर्म्म के (न) सदृश (पुरू) बहुत (शर्वा) सम्पूर्ण हिंसनों और (सहस्रा) हजारों को (नि, बर्हीत्) नाश करे वह और आप इस प्रकार से सुख को (याताम्) प्राप्त होओ ॥३॥
Essence
इस मन्त्र में उपमावाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे मध्याह्न में सूर्य्य सब को तपाता है, वैसे ही न्यायकारी राजा दुष्ट चोरादिकों को दुःख देता है और अग्नि के सदृश भस्मीभूत करके सम्पूर्ण हिंसा दूर करे ॥३॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.