Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 24 / Mantra 7

58 Sukta
11 Mantra
4/24/7
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
य इन्द्रा॑य सु॒नव॒त्सोम॑म॒द्य पचा॑त्प॒क्तीरु॒त भृ॒ज्जाति॑ धा॒नाः। प्रति॑ मना॒योरु॒चथा॑नि॒ हर्य॒न्तस्मि॑न्दध॒द्वृष॑णं॒ शुष्म॒मिन्द्रः॑ ॥७॥

यः । इन्द्रा॑य । सु॒नव॑त् । सोम॑म् । अ॒द्य । पचा॑त् । प॒क्तीः । उ॒त । भृ॒ज्जाति॑ । धा॒नाः । प्रति॑ । म॒ना॒योः । उ॒चथा॑नि । हर्य॑न् । तस्मि॑न् । दध॑त् । वृष॑णम् । शुष्म॑म् । इन्द्रः॑ ॥

Mantra without Swara
य इन्द्राय सुनवत्सोममद्य पचात्पक्तीरुत भृज्जाति धानाः। प्रति मनायोरुचथानि हर्यन्तस्मिन्दधद्वृषणं शुष्ममिन्द्रः ॥

यः। इन्द्राय। सुनवत्। सोमम्। अद्य। पचात्। पक्तीः। उत। भृज्जाति। धानाः। प्रति। मनायोः। उचथानि। हर्यन्। तस्मिन्। दधत्। वृषणम्। शुष्मम्। इन्द्रः ॥७॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 12 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
(यः) जो (इन्द्रः) राजा (अद्य) आज (इन्द्राय) सुख देनेवाले द्रव्य और ऐश्वर्य्ययुक्त के लिये (सोमम्) ऐश्वर्य्य को (सुनवत्) उत्पन्न करे (पक्तीः) पाकों को (पचात्) पकावे (उत) और (धानाः) यवों को (भृज्जाति) भूँजे (मनायोः) प्रशंसा की कामना करनेवाले की (उचथानि) रुचि करनेवालों की (हर्य्यन्) कामना करता हुआ (तस्मिन्) उसमें (वृषणम्) बल करनेवाले (शुष्मम्) बलयुक्त पुरुष को (प्रति, दधत्) धारण करे, वह बहुत जीतनेवाली सेना को प्राप्त होवे ॥७॥
Essence
जो राजपुरुष राज्य के लिये ऐश्वर्य्य को बल और सेना के लिये भोजन आदि सामग्रियों को धारण करें, वे प्रीतिकारक सुखों को प्राप्त होवें ॥७॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.