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Rigveda Mandal 4 / Sukta 23 / Mantra 3

58 Sukta
11 Mantra
4/23/3
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
क॒था शृ॑णोति हू॒यमा॑न॒मिन्द्रः॑ क॒था शृ॒ण्वन्नव॑सामस्य वेद। का अ॑स्य पू॒र्वीरुप॑मातयो ह क॒थैन॑माहुः॒ पपु॑रिं जरि॒त्रे ॥३॥

क॒था । शृ॒णो॒ति॒ । हू॒यमा॑नम् । इन्द्रः॑ । क॒था । शृ॒ण्वन् । अव॑साम् । अ॒स्य॒ । वे॒द॒ । काः । अ॒स्य॒ । पू॒र्वीः । उप॑ऽमातयः । ह॒ । क॒था । ए॒न॒म् । आहुः॑ । पपु॑रिम् । ज॒रि॒त्रे ॥

Mantra without Swara
कथा शृणोति हूयमानमिन्द्रः कथा शृण्वन्नवसामस्य वेद। का अस्य पूर्वीरुपमातयो ह कथैनमाहुः पपुरिं जरित्रे ॥

कथा। शृणोति। हूयमानम्। इन्द्रः। कथा। शृण्वन्। अवसाम्। अस्य। वेद। काः। अस्य। पूर्वीः। उपऽमातयः। ह। कथा। एनम्। आहुः। पपुरिम्। जरित्रे ॥३॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 9 Mantra » 3

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Meaning
हे मनुष्यो ! (इन्द्रः) अध्यापक वा राजा (हूयमानम्) स्पर्द्धा करते हुए को (कथा) किस प्रकार (शृणोति) सुनता है और (शृण्वन्) सुनता हुआ (अस्य) इसके (अवसाम्) रक्षण आदिकों की स्पर्द्धा करते हुए को (कथा) किस प्रकार से (वेद) जाने (अस्य) इसकी (पूर्वीः) प्राचीन (उपमातयः) उपमा (ह) ही (काः) कौन हैं? अनन्तर (एनम्) इसको (जरित्रे) विद्वान् के लिये (पपुरिम्) पालन करनेवाला (कथा) किस प्रकार (आहुः) कहते हैं, ऐसा पूछना चाहिए ॥३॥
Essence
जो विद्यार्थी और राजा के जन यथार्थवक्ता पुरुषों के वचनों के शास्त्रों को उत्तम प्रकार सुन, मान और निश्चय करके पुनः कर्मों का आरम्भ करते हैं, वे ही सम्पूर्ण जानने योग्य को जानते हैं ॥३॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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