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Rigveda Mandal 4 / Sukta 23 / Mantra 2

58 Sukta
11 Mantra
4/23/2
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
को अ॑स्य वी॒रः स॑ध॒माद॑माप॒ समा॑नंश सुम॒तिभिः॒ को अ॑स्य। कद॑स्य चि॒त्रं चि॑किते॒ कदू॒ती वृ॒धे भु॑वच्छशमा॒नस्य॒ यज्योः॑ ॥२॥

कः । अ॒स्य॒ । वी॒रः । स॒ध॒ऽमाद॑म् । आ॒प॒ । सम् । आ॒नं॒श॒ । सु॒म॒तिऽभिः॑ । कः । अ॒स्य॒ । कत् । अ॒स्य॒ । चि॒त्रम् । चि॒कि॒ते॒ । कत् । ऊ॒ती । वृ॒धे । भु॒व॒त् । श॒श॒मा॒नस्य॑ । यज्योः॑ ॥

Mantra without Swara
को अस्य वीरः सधमादमाप समानंश सुमतिभिः को अस्य। कदस्य चित्रं चिकिते कदूती वृधे भुवच्छशमानस्य यज्योः ॥

कः। अस्य। वीरः। सधऽमादम्। आप। सम्। आनंश। सुमतिऽभिः। कः। अस्य। कत्। अस्य। चित्रम्। चिकिते। कत्। ऊती। वृधे। भुवत्। शशमानस्य। यज्योः ॥२॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 9 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! (कः) कौन (वीरः) विद्या से प्राप्त शरीर और आत्मबलयुक्त (अस्य) इस अध्यापक वा राजा के (सधमादम्) साथ आनन्द को (आप) प्राप्त होवे (कः) कौन वीर (अस्य) इसके (सुमतिभिः) श्रेष्ठ विद्वानों के साथ (चित्रम्) अद्भुत विज्ञान को (चिकिते) जानता है (कत्) कब (अस्य) इसको विद्या को (सम्, आनंश) प्राप्त होता है और कौन वीर (ऊती) रक्षण आदि से (शशमानस्य) प्रशंसित (यज्योः) संगम करने योग्य सत्य व्यवहार की (वृधे) वृद्धि के लिये (कत्) कब (भुवत्) होवे ॥२॥
Essence
हे विद्वन् वा राजन् ! कौन किसके साथ पढ़े? कौन किसके साथ न्याय करे? वा युद्ध करे? कौन इनमें श्रेष्ठ? इस प्रश्न का जो प्रशंसित कर्म्मों के अनुष्ठान और वृद्धि करनेवाले होवें, यह उत्तर है ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥