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Rigveda Mandal 4 / Sukta 22 / Mantra 8

58 Sukta
11 Mantra
4/22/8
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
पि॒पी॒ळे अं॒शुर्मद्यो॒ न सिन्धु॒रा त्वा॒ शमी॑ शशमा॒नस्य॑ श॒क्तिः। अ॒स्म॒द्र्य॑क्शुशुचा॒नस्य॑ यम्या आ॒शुर्न र॒श्मिं तु॒व्योज॑सं॒ गोः ॥८॥

पि॒पी॒ळे । अं॒शुः । मद्यः॑ । न । सिन्धुः॑ । आ । त्वा॒ । शमी॑ । श॒श॒मा॒नस्य॑ । श॒क्तिः । अ॒स्म॒द्र्य॑क् । शु॒शु॒मा॒नस्य॑ । य॒म्याः॒ । आ॒शुः । न । र॒श्मिम् । तु॒वि॒ऽओज॑सम् । गोः ॥

Mantra without Swara
पिपीळे अंशुर्मद्यो न सिन्धुरा त्वा शमी शशमानस्य शक्तिः। अस्मद्र्यक्शुशुचानस्य यम्या आशुर्न रश्मिं तुव्योजसं गोः ॥

पिपीळे। अंशुः। मद्यः। न। सिन्धुः। आ। त्वा। शमी। शशमानस्य। शक्तिः। अस्मद्र्यक्। शुशुचानस्य। यम्याः। आशुः। न। रश्मिम्। तुविऽओजसम्। गोः ॥८॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 8 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे राजन् ! (मद्यः) आनन्दित करानेवाली (सिन्धुः) नदी जैसे (न) वैसे जिन आपको (अंशुः) पदार्थ पहुँचनेवाला (आ, पिपीळे) पीड़ा देता है उन (शशमानस्य) अधर्म्म का उल्लङ्घन करने (शुशुचानस्य) अत्यन्त शोधने और (गोः) स्तुति करनेवाले आपके (आशुः) शीघ्र चलनेवाले घोड़े के (न) सदृश (यम्याः) रात्रियाँ (रश्मिम्) सूर्य्य के प्रकाश को जैसे वैसे जो (अस्मद्र्यक्) हम को प्राप्त होनेवाली (शक्तिः) सामर्थ्य हम लोगों का पालन करे वह और (शमी) उत्तम कर्म्म (तुव्योजसम्) बहुत बल और पराक्रमयुक्त (त्वा) आपको प्राप्त होवे ॥८॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । हे प्रजाजनो ! जो लोग अपने राजा को पीड़ा देवें, वे आप लोगों से नाश करने योग्य हैं और जैसे रात्रियाँ किरणों को नष्ट करती हैं, वैसे ही धार्म्मिक राजा के बल को प्राप्त होकर शत्रु दूर होते हैं ॥८॥
Subject
अब राजनीति के अध्ययन से अध्यापकविषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥