Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 22 / Mantra 7

58 Sukta
11 Mantra
4/22/7
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अत्राह॑ ते हरिव॒स्ता उ॑ दे॒वीरवो॑भिरिन्द्र स्तवन्त॒ स्वसा॑रः। यत्सी॒मनु॒ प्र मु॒चो ब॑द्बधा॒ना दी॒र्घामनु॒ प्रसि॑तिं स्यन्द॒यध्यै॑ ॥७॥

अत्र॑ । अह॑ । ते॒ । ह॒रि॒ऽवः॒ । ताः । ऊँ॒ इति॑ । दे॒वीः । अवः॑ऽभिः । इ॒न्द्र॒ । स्त॒व॒न्त॒ । स्वसा॑रः । यत् । सी॒म् । अनु॑ । प्र । मु॒चः । ब॒द्ब॒धा॒नाः । दी॒र्घाम् । अनु॑ । प्रऽसि॑तिम् । स्य॒न्द॒यध्यै॑ ॥

Mantra without Swara
अत्राह ते हरिवस्ता उ देवीरवोभिरिन्द्र स्तवन्त स्वसारः। यत्सीमनु प्र मुचो बद्बधाना दीर्घामनु प्रसितिं स्यन्दयध्यै ॥

अत्र। अह। ते। हरिऽवः। ताः। ऊम् इति। देवीः। अवःऽभिः। इन्द्र। स्तवन्त। स्वसारः। यत्। सीम्। अनु। प्र। मुचः। बद्बधानाः। दीर्घाम्। अनु। प्रऽसितिम्। स्यन्दयध्यै ॥७॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 8 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (हरिवः) श्रेष्ठ पुरुषों से और (इन्द्र) अत्यन्त ऐश्वर्य्य से युक्त (अत्र) इस राज्य में (अह) ग्रहण करने में (यत्) जो (ते) आपकी (बद्बधानाः) प्रबन्ध करनेवाली (स्वसारः) अङ्गुलियों के समान वर्त्तमान बहिनपने का आचरण करती और पढ़ी हुई स्त्रियाँ (स्यन्दयध्यै) बहाने को (दीर्घाम्) लम्बीभूत (प्रसितिम्) बन्धावट की (अनु, स्तवन्त) अनुकूल स्तुति करती हैं (ताः, उ) उन्हीं (देवीः) प्रकाशित पढ़ी हुई स्त्रियों को (अवोभिः) रक्षण आदि व्यवहारों से (सीम्) सब प्रकार दुःखरूप बन्धन से आप (अनु, प्र, मुचः) अच्छे प्रकार छुड़ाइये ॥७॥
Essence
हे राजा आदि मनुष्यो ! जैसे आप लोग ब्रह्मचर्य से विद्याओं को पढ़कर राजनीति से राज्य का पालन करते हैं, वैसे ही आप लोगों की स्त्रियाँ स्त्रियों का न्याय करें। ऐसा करने पर दृढ़ राज्यधर्म्म का प्रबन्ध होता है, ऐसा जानना चाहिये ॥७॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.