Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 21 / Mantra 10

58 Sukta
11 Mantra
4/21/10
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
ए॒वा वस्व॒ इन्द्रः॑ स॒त्यः स॒म्राड्ढन्ता॑ वृ॒त्रं वरि॑वः पू॒रवे॑ कः। पुरु॑ष्टुत॒ क्रत्वा॑ नः शग्धि रा॒यो भ॑क्षी॒य तेऽव॑सो॒ दैव्य॑स्य ॥१०॥

ए॒व । वस्वः॑ । इन्द्रः॑ । स॒त्यः । स॒म्ऽराट् । हन्ता॑ । वृ॒त्रम् । वरि॑वः । पू॒रवे॑ । क॒रिति॑ कः । पुरु॑ऽस्तुत । क्रत्वा॑ । नः॒ । श॒ग्धि॒ । रा॒यः । भ॒क्षी॒य । ते । अव॑सः । दैव्य॑स्य ॥

Mantra without Swara
एवा वस्व इन्द्रः सत्यः सम्राड्ढन्ता वृत्रं वरिवः पूरवे कः। पुरुष्टुत क्रत्वा नः शग्धि रायो भक्षीय तेऽवसो दैव्यस्य ॥

एव। वस्वः। इन्द्रः। सत्यः। सम्ऽराट्। हन्ता। वृत्रम्। वरिवः। पूरवे। करिति कः। पुरुऽस्तुत। क्रत्वा। नः। शग्धि। रायः। भक्षीय। ते। अवसः। दैव्यस्य ॥१०॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 6 Mantra » 5

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (पुरुष्टुत) बहुतों से प्रशंसित ! जो (सत्यः) श्रेष्ठ पुरुषों में श्रेष्ठ (इन्द्रः) ऐश्वर्य्य के देनेवाले आप सूर्य (वृत्रम्) मेघ को जैसे वैसे शत्रुओं को (हन्ता, एवा) नाश करनेवाले ही (सम्राट्) सम्पूर्ण भूमि के राजा (पूरवे) धार्मिक मनुष्य के लिये (वस्वः) धन का (वरिवः) सेवन (कः) करें और जो आप (क्रत्वा) श्रेष्ठ बुद्धि वा उत्तम कर्म्म से (नः) हम लोगों के लिये (रायः) धनों को (शग्धि) देवें उन्हीं (ते) आपके (दैव्यस्य) श्रेष्ठ सुख प्राप्त करानेवाले (अवसः) रक्षण की उत्तेजना से रक्षित मैं धनों का (भक्षीय) सेवन वा भोग करूँ ॥१०॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो सूर्य के सदृश प्रकाशित, न्याययुक्त, अभय का देनेवाला और सब प्रकार से सब का रक्षक नायक होवे, वही चक्रवर्त्ती होने के योग्य होता है ॥१०॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.