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Rigveda Mandal 4 / Sukta 20 / Mantra 8

58 Sukta
11 Mantra
4/20/8
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ईक्षे॑ रा॒यः क्षय॑स्य चर्षणी॒नामु॒त व्र॒जम॑पव॒र्तासि॒ गोना॑म्। शि॒क्षा॒न॒रः स॑मि॒थेषु॑ प्र॒हावा॒न्वस्वो॑ रा॒शिम॑भिने॒तासि॒ भूरि॑म् ॥८॥

ईक्षे॑ । रा॒यः । क्षय॑स्य । च॒र्ष॒णी॒नाम् । उ॒त । व्र॒जम् । अ॒प॒ऽव॒र्ता । अ॒सि॒ । गोना॑म् । शि॒क्षा॒ऽन॒रः । स॒म्ऽइ॒थेषु॑ । प्र॒हाऽवा॒न् । वस्वः॑ । रा॒शिम् । अ॒भि॒ऽने॒ता । अ॒सि॒ । भूरि॑म् ॥

Mantra without Swara
ईक्षे रायः क्षयस्य चर्षणीनामुत व्रजमपवर्तासि गोनाम्। शिक्षानरः समिथेषु प्रहावान्वस्वो राशिमभिनेतासि भूरिम् ॥

ईक्षे। रायः। क्षयस्य। चर्षणीनाम्। उत। व्रजम्। अपऽवर्ता। असि। गोनाम्। शिक्षाऽनरः। सम्ऽइथेषु। प्रहाऽवान्। वस्वः। राशिम्। अभिऽनेता। असि। भूरिम् ॥८॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 4 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे राजन् ! जिस कारण (शिक्षानरः) विद्या के देने से नायक आप (प्रहावान्) विजय को प्राप्त तथा (समिथेषु) संग्रामों में (वस्वः) धन के (भूरिम्) बहुत प्रकार के (राशिम्) समूह को (अभिनेता) सम्मुख पहुँचानेवाले (असि) हो और (चर्षणीनाम्) मनुष्यों के (रायः) धन (क्षयस्य) निवास (उत) और (गोनाम्) स्तुति करनेवालों के सम्बन्धी (व्रजम्) शस्त्र-अस्त्रों को (अपवर्त्ता) दूर करनेवाले (असि) हो उनको मैं राजा होने को (ईक्षे) देखता हूँ ॥८॥
Essence
वही राजा दिशाओं में यशस्वी होवे कि जो मनुष्यों को विद्या, धन और उत्तम वास देकर संग्रामादिकों में निरन्तर सब की रक्षा करे ॥८॥
Subject
फिर राजविषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥