Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 18 / Mantra 2

58 Sukta
13 Mantra
4/18/2
Devata- इन्द्रादिती Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
नाहमतो॒ निर॑या दु॒र्गहै॒तत्ति॑र॒श्चता॑ पा॒र्श्वान्निर्ग॑माणि। ब॒हूनि॑ मे॒ अकृ॑ता॒ कर्त्वा॑नि॒ युध्यै॑ त्वेन॒ सं त्वे॑न पृच्छै ॥२॥

न । अ॒हम् । अतः॑ । निः । अ॒य॒ । दुः॒ऽगहा॑ । ए॒तत् । ति॒र॒श्चता॑ । पा॒र्श्वात् । निः । ग॒मा॒नि॒ । ब॒हूनि॑ । मे॒ । अकृ॑ता । कर्त्वा॑नि । युध्यै॑ । त्वे॒न॒ । सम् । त्वे॒न॒ । पृ॒च्छै॒ ॥

Mantra without Swara
नाहमतो निरया दुर्गहैतत्तिरश्चता पार्श्वान्निर्गमाणि। बहूनि मे अकृता कर्त्वानि युध्यै त्वेन सं त्वेन पृच्छै ॥

न। अहम्। अतः। निः। अय। दुःऽगहा। एतत्। तिरश्चता। पार्श्वात्। निः। गमानि। बहूनि। मे। अकृता। कर्त्वानि। युध्यै। त्वेन। सम्। त्वेन। पृच्छै ॥२॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 25 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! जैसे (अहम्) मैं (दुर्गहा) दुःख से प्राप्त होने योग्यों का नाश करनेवाला (न) न होऊँ (पार्श्वात्) पाश से (निः, गमानि) जाऊँ (मे) मेरे (बहूनि) बहुत (अकृता) न किये गये (कर्त्वानि) कर्त्तव्य कर्म हैं (तिरश्चता) तिरछे बाँके से (त्वेन) किससे (युध्यै) युद्ध करूँ (त्वेन) अन्य से (सम्, पृच्छै) पूछूँ, वैसे आप (अतः) इस कारण से (एतत्) इस पूर्वोक्त को (निः) अत्यन्त (अय) प्राप्त होओ ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे मनुष्यो ! जैसे मैं कर्म नहीं करता हूँ और करके न किये गये न रखता हूँ, मेरे साथ जो युद्ध की इच्छा करे, उसके साथ युद्ध में पूछने योग्य को पूछता हूँ, वैसे इस सब का आचरण करो ॥२॥
Subject
फिर दृष्टान्त से पूर्वोक्त विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.