Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 17 / Mantra 19

58 Sukta
21 Mantra
4/17/19
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स्तु॒त इन्द्रो॑ म॒घवा॒ यद्ध॑ वृ॒त्रा भूरी॒ण्येको॑ अप्र॒तीनि॑ हन्ति। अ॒स्य प्रि॒यो ज॑रि॒ता यस्य॒ शर्म॒न्नकि॑र्दे॒वा वा॒रय॑न्ते॒ न मर्ताः॑ ॥१९॥

स्तु॒तः । इन्द्रः॑ । म॒घऽवा॑ । यत् । ह॒ । वृ॒त्रा । भूरी॑णि । एकः॑ । अ॒प्र॒तीनि॑ । ह॒न्ति॒ । अ॒स्य । प्रि॒यः । ज॒रि॒ता । यस्य॑ । शर्म॑न् । नकिः॑ । दे॒वाः । वा॒रय॑न्ते । न । मर्ताः॑ ॥

Mantra without Swara
स्तुत इन्द्रो मघवा यद्ध वृत्रा भूरीण्येको अप्रतीनि हन्ति। अस्य प्रियो जरिता यस्य शर्मन्नकिर्देवा वारयन्ते न मर्ताः ॥

स्तुतः। इन्द्रः। मघऽवा। यत्। ह। वृत्रा। भूरीणि। एकः। अप्रतीनि। हन्ति। अस्य। प्रियः। जरिता। यस्य। शर्मन्। नकिः। देवाः। वारयन्ते। न। मर्ताः ॥१९॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 24 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे राजन् ! (यस्य) जिसके (शर्मन्) गृह में (प्रियः) मनोहर (जरिता) स्तुति करनेवाला (स्तुतः) प्रशंसित (मघवा) बहुत ऐश्वर्य्य से युक्त (इन्द्रः) सूर्य्य के सदृश प्रतापी राजा जैसे सूर्य्य (अप्रतीनि) नहीं प्रतीत (भूरीणि) बहुत (वृत्रा) मेघों के अवयवों को (एकः) सहायरहित अर्थात् अकेला भी (हन्ति) नाश करता है, वैसे ही (यत्) जो असहाय (अस्य) इसकी सेना में (ह) निश्चय से विद्वान् बहुतों का नाश करनेवाला वर्त्ताव करे उसको (देवाः) विद्वान् लोग (नकिः) नहीं (वारयन्ते) रोकते हैं और (न)(मर्त्ताः) अविद्वान् लोग ॥१९॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो राजा सत्य के उपदेशक अपने प्रियकारक विद्वानों की राजकृत्य में रक्षा करे, उसका पराजय करने को कोई भी नहीं समर्थ होवे ॥१९॥
Subject
फिर कैसे जनों को राजा राज्यकर्म्मों में रक्खे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥