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Rigveda Mandal 4 / Sukta 17 / Mantra 15

58 Sukta
21 Mantra
4/17/15
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- याजुषीपङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
असि॑क्न्यां॒ यज॑मानो॒ न होता॑ ॥१५॥

असि॑क्न्याम् । यज॑मानः । न । होता॑ ॥

Mantra without Swara
असिक्न्यां यजमानो न होता ॥

असिक्न्याम्। यजमानः। न। होता ॥१५॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 23 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
जो राजा (यजमानः) मेल करनेवाले के (न) सदृश (असिक्न्याम्) रात्रि में भयरहित (होता) सुख को देनेवाला होवे, वही निरन्तर आनन्द करे ॥१५॥
Essence
जिस राजा के प्रजाजनों में प्राणियों वा शयन किये हुओं में दण्ड जागता है, वह अभय का देनेवाला पुरुष किसी से भी भय को नहीं प्राप्त होता है ॥१५॥
Subject
अब राजदण्ड की प्रकर्षता को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥