Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 16 / Mantra 20

58 Sukta
21 Mantra
4/16/20
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
ए॒वेदिन्द्रा॑य वृष॒भाय॒ वृष्णे॒ ब्रह्मा॑कर्म॒ भृग॑वो॒ न रथ॑म्। नू चि॒द्यथा॑ नः स॒ख्या वि॒योष॒दस॑न्न उ॒ग्रो॑ऽवि॒ता त॑नू॒पाः ॥२०॥

ए॒व । इत् । इन्द्रा॑य । वृ॒ष॒भाय॑ । वृष्णे॑ । ब्रह्म॑ । अ॒क॒र्म॒ । भृग॑वः । न । रथ॑म् । नु । चि॒त् । यथा॑ । नः॒ । स॒ख्या । वि॒ऽयोष॑त् । अस॑त् । नः॒ । उ॒ग्रः । अ॒वि॒ता । त॒नू॒ऽपाः ॥

Mantra without Swara
एवेदिन्द्राय वृषभाय वृष्णे ब्रह्माकर्म भृगवो न रथम्। नू चिद्यथा नः सख्या वियोषदसन्न उग्रोऽविता तनूपाः ॥

एव। इत्। इन्द्राय। वृषभाय। वृष्णे। ब्रह्म। अकर्म। भृगवः। न। रथम्। नु। चित्। यथा। नः। सख्या। विऽयोषत्। असत्। नः। उग्रः। अविता। तनूऽपाः ॥२०॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 20 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(यथा) जैसे राजा (नः) हमारे (सख्या) मित्र के साथ (वियोषत्) धारण करे (उग्रः) तेजस्वी (तनूपाः) शरीर का पालन करनेवाला हुआ (नः) हम लोगों का (नु) शीघ्र (अविता) रक्षक (असत्) होवे (इत्, एव) उसी (वृषभाय) बैल के सदृश बलिष्ठ (वृष्णे) वीर्यवान् (इन्द्राय) अत्यन्त ऐश्वर्य के देनेवाले के लिये (भृगवः) प्रकाशमान (रथम्) वाहन के (न) सदृश (ब्रह्म, चित्) बड़े भी धन को हम लोग (अकर्म) सिद्ध करें ॥२०॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । जैसे शिल्पीजन विद्या के साथ पदार्थों के संयोग से विमान आदि की रचना करके धनवान् होकर मित्रों का सत्कार करते हैं, वैसे ही राजा से सत्कार किये गये हम लोग राजा से ऐश्वर्य की वृद्धि करके सब राजा आदिकों का सत्कार करें ॥२०॥
Subject
फिर मन्त्री आदि कर्मचारियों के विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥