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Rigveda Mandal 4 / Sukta 16 / Mantra 15

58 Sukta
21 Mantra
4/16/15
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- स्वराट्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
इन्द्रं॒ कामा॑ वसू॒यन्तो॑ अग्म॒न्त्स्व॑र्मीळ्हे॒ न सव॑ने चका॒नाः। श्र॒व॒स्यवः॑ शशमा॒नास॑ उ॒क्थैरोको॒ न र॒ण्वा सु॒दृशी॑व पु॒ष्टिः ॥१५॥

इन्द्र॑म् । कामाः॑ । व॒सु॒ऽयन्तः॑ । अ॒ग्म॒न् । स्वः॑ । मीळ्हे॑ । न । सव॑ने । च॒का॒नाः । श्र॒व॒स्यवः॑ । श॒श॒मा॒नासः॑ । उ॒क्थैः । ओकः॑ । न । र॒ण्वा । सु॒दृशी॑ऽइव । पु॒ष्टिः ॥

Mantra without Swara
इन्द्रं कामा वसूयन्तो अग्मन्त्स्वर्मीळ्हे न सवने चकानाः। श्रवस्यवः शशमानास उक्थैरोको न रण्वा सुदृशीव पुष्टिः ॥

इन्द्रम्। कामाः। वसुऽयन्तः। अग्मन्। स्वःऽमीळ्हे। न। सवने। चकानाः। श्रवस्यवः। शशमानासः। उक्थैः। ओकः। न। रण्वा। सुदृशीऽइव। पुष्टिः ॥१५॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 19 Mantra » 5

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Meaning
हे राजन् ! जो (वसूयन्तः) अपने को धनों की इच्छा करते हुए (कामाः) कामना करनेवाले (सवने) प्रेरणा करने में (चकानाः) प्रकाशमान (श्रवस्यवः) अपने को अन्न की इच्छा करते हुए (शशमानासः) शत्रुओं के बल का उल्लङ्घन करनेवाले (उक्थैः) प्रशंसित गुणों से (ओकः) गृह के (न) सदृश (स्वर्मीळ्हे) जैसे सुख से युक्त संग्राम में (न) वैसे जो (सुदृशीव) उत्तम प्रकार देखने के योग्य सी (रण्वा) सुन्दर (पुष्टिः) पुष्टि उसको (अग्मन्) प्राप्त होते हैं, उसको प्राप्त होकर (इन्द्रम्) अत्यन्त ऐश्वर्य्यवाले को और उन पूर्वोक्त जनों को आप सेना और राज्य के कर्मचारी करिये ॥१५॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो धन की कामनावाले होवें, वे शरीर और आत्मा के बल को बढ़ाके युद्ध की विद्या और सामग्री पूर्ण करें ॥१५॥
Subject
अब राजविषय में सेना और अमात्य आदिकों की योग्यता के विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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