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Rigveda Mandal 4 / Sukta 15 / Mantra 9

58 Sukta
10 Mantra
4/15/9
Devata- अश्विनौ Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए॒ष वां॑ देवावश्विना कुमा॒रः सा॑हदे॒व्यः। दी॒र्घायु॑रस्तु॒ सोम॑कः ॥९॥

ए॒षः । वा॒म् । दे॒वौ॒ । अ॒श्वि॒ना॒ । कु॒मा॒रः । सा॒ह॒ऽदे॒व्यः । दी॒र्घऽआ॑युः । अ॒स्तु॒ । सोम॑कः ॥

Mantra without Swara
एष वां देवावश्विना कुमारः साहदेव्यः। दीर्घायुरस्तु सोमकः ॥

एषः। वाम्। देवौ। अश्विना। कुमारः। साहऽदेऽव्यः। दीर्घऽआयुः। अस्तु। सोमकः ॥९॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 16 Mantra » 4

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Meaning
हे (देवौ) विद्वानो (अश्विना) सम्पूर्ण विद्याओं में व्याप्त आप दोनों ! जैसे (एषः) यह ब्रह्मचारी (वाम्) आप दोनों अध्यापक और उपदेशक के (साहदेव्यः) विद्वानों के साथ रहनेवालों में श्रेष्ठ (सोमकः) चन्द्रमा के सदृश शीतलस्वभाववाला (कुमारः) ब्रह्मचारी (दीर्घायुः) बहुत काल पर्य्यन्त जीवनेवाला (अस्तु) हो वैसा प्रयत्न करो ॥९॥
Essence
अध्यापक और उपदेशक ऐसा प्रयत्न करें कि जिससे धार्मिक अधिक अवस्थावाले और विद्वान् पढ़नेवाले होवें ॥९॥
Subject
अब अध्यापक और उपदेशक विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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