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Rigveda Mandal 4 / Sukta 15 / Mantra 8

58 Sukta
10 Mantra
4/15/8
Devata- सोमकः साहदेव्यः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒त त्या य॑ज॒ता हरी॑ कुमा॒रात्सा॑हदे॒व्यात्। प्रय॑ता स॒द्य आ द॑दे ॥८॥

उ॒त । त्या । य॒ज॒ता । हरी॒ इति॑ । कु॒मा॒रात् । सा॒ह॒दे॒व्यात् । प्रऽय॑ता । स॒द्यः । आ । द॒दे॒ ॥

Mantra without Swara
उत त्या यजता हरी कुमारात्साहदेव्यात्। प्रयता सद्य आ ददे ॥

उत। त्या। यजता। हरी इति। कुमारात्। साहऽदेव्यात्। प्रऽयता। सद्यः। आ। ददे ॥८॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 16 Mantra » 3

Bhashya

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Meaning
(त्या) वे दोनों (यजता) देने और (हरी) अविद्या के हरनेवाले (प्रयता) प्रयत्न करते हुए अध्यापकोपदेशक (साहदेव्यात्) विद्वानों के साथ रहनेवालों में उत्तम (कुमारात्) ब्रह्मचारी से प्रतिज्ञा को ग्रहण करें (उत) और उन दोनों से ब्रह्मचारी विद्या (सद्यः) शीघ्र (आ, ददे) ग्रहण करे ॥८॥
Essence
जब विद्यार्थी और विद्यार्थिनी पढ़ने के लिये जावें, तब उनको चाहिये कि प्रतिज्ञा करें कि हम लोग धर्म्मयुक्त ब्रह्मचर्य्य से आपके अनुकूल वर्त्ताव करके विद्या का अभ्यास करेंगे और मध्य में ब्रह्मचर्य्य व्रत का न लोप करेंगे और अध्यापक लोग यह प्रतिज्ञा करें कि हम निष्कपटता से विद्यादान करेंगे ॥८॥
Subject
अब अध्येतृविषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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