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Rigveda Mandal 4 / Sukta 15 / Mantra 7

58 Sukta
10 Mantra
4/15/7
Devata- सोमकः साहदेव्यः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
बोध॒द्यन्मा॒ हरि॑भ्यां कुमा॒रः सा॑हदे॒व्यः। अच्छा॒ न हू॒त उद॑रम् ॥७॥

बोध॑त् । यत् । मा॒ । हरि॑ऽभ्याम् । कु॒मा॒रः । सा॒ह॒ऽदे॒व्यः । अच्छ॑ । न । हू॒तः । उत् । अ॒र॒म् ॥

Mantra without Swara
बोधद्यन्मा हरिभ्यां कुमारः साहदेव्यः। अच्छा न हूत उदरम् ॥

बोधत्। यत्। मा। हरिऽभ्याम्। कुमारः। साहऽदेव्यः। अच्छ। न। हूतः। उत्। अरम् ॥७॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 16 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे अध्यापक ! (यत्) जो (साहदेव्यः) जो विद्वानों के साथ वर्त्तमान उनमें श्रेष्ठ (कुमारः) ब्रह्मचारी मैं (हूतः) प्रशंसित होता हुआ (अरम्) पूर्ण (न) न जानूँ उस (मा) मुझको (हरिभ्याम्) घोड़ों के सदृश (अच्छ) अच्छे प्रकार (उत्, बोधत्) उत्तम बोध दीजिये ॥७॥
Essence
जब कुमार और कुमारियाँ माता और पिता से शिक्षा को प्राप्त हुए आचार्य के कुल को जावें, तब आचार्य के प्रिय आचरण और विनय से उसकी प्रार्थना करके विद्या की याचना करें, जो ऐसा करे, वह श्रेष्ठ घोड़ों से युक्त रथ से जैसे वैसे विद्या के पार को जावे ॥७॥
Subject
अब अध्यापक विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥७॥