Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 14 / Mantra 3

58 Sukta
5 Mantra
4/14/3
Devata- अग्निर्लिङ्गोक्ता वा Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- स्वराट्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
आ॒वह॑न्त्यरु॒णीर्ज्योति॒षागा॑न्म॒ही चि॒त्रा र॒श्मिभि॒श्चेकि॑ताना। प्र॒बो॒धय॑न्ती सुवि॒ताय॑ दे॒व्यु१॒॑षा ई॑यते सु॒युजा॒ रथे॑न ॥३॥

आ॒ऽवह॑न्ती । अ॒रु॒णीः । ज्योति॒षा । आ । अ॒गा॒त् । म॒ही । चि॒त्रा । र॒श्मिऽभिः॑ । चेकि॑ताना । प्र॒ऽबो॒धय॑न्ती । सु॒ऽवि॒ताय॑ । दे॒वी । उ॒षाः । ई॒य॒ते॒ । सु॒ऽयुजा॑ । रथे॑न ॥

Mantra without Swara
आवहन्त्यरुणीर्ज्योतिषागान्मही चित्रा रश्मिभिश्चेकिताना। प्रबोधयन्ती सुविताय देव्यु१षा ईयते सुयुजा रथेन ॥

आऽवहन्ती। अरुणीः। ज्योतिषा। आ। अगात्। मही। चित्रा। रश्मिऽभिः। चेकिताना। प्रऽबोधयन्ती। सुविताय। देवी। उषाः। ईयते। सुऽयुजा। रथेन ॥३॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 14 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे विद्यायुक्त और उत्तम गुणवाली स्त्रि ! तू जैसे (सुयुजा) उत्तम प्रकार जोड़ते हैं घोड़ों को जिसमें उस (रथेन) वाहन के सदृश (रश्मिभिः) अपने किरणों से (चेकिताना) प्राणियों को जनाती हुई और (सुविताय) ऐश्वर्य के लिये (प्रबोधयन्ती) जगाती हुई (ज्योतिषा) प्रकाश से (चित्रा) अद्भुतस्वरूपवाली (अरुणीः) किञ्चित् लाल आभायुक्त कान्तियों को (आवहन्ती) सब प्रकार प्राप्त कराती हुई (मही) बड़ी (देवी) अत्यन्त प्रकाशमान (उषाः) प्रातःकाल की वेला (ईयते) जाती और (आ, आगात्) आती है, वैसे आप हूजिये ॥३॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो सुन्दर प्रिया उत्तम लक्षणों से युक्त, अद्भुत रूपवाली, पतिव्रता स्त्री पुरुष को प्राप्त होवे, वह प्रातःकाल के सदृश कुल का प्रकाश करती हुई और सन्तानों को उत्तम शिक्षा देती हुई सब को आनन्द देती है ॥३॥
Subject
अब विदुषी के गुणों को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥