Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 11 / Mantra 2

58 Sukta
6 Mantra
4/11/2
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
वि षा॑ह्यग्ने गृण॒ते म॑नी॒षां खं वेप॑सा तुविजात॒ स्तवा॑नः। विश्वे॑भि॒र्यद्वा॒वनः॑ शुक्र दे॒वैस्तन्नो॑ रास्व सुमहो॒ भूरि॒ मन्म॑ ॥२॥

वि । सा॒हि॒ । अ॒ग्ने॒ । गृ॒ण॒ते । म॒नी॒षाम् । खम् । वेप॑सा । तु॒वि॒ऽजा॒त॒ । स्तवा॑नः । विश्वे॑भिः । यत् । व॒वनः॑ । शु॒क्र॒ । दे॒वैः । तत् । नः॒ । रा॒स्व॒ । सु॒ऽम॒हः॒ । भूरि॑ । मन्म॑ ॥

Mantra without Swara
वि षाह्यग्ने गृणते मनीषां खं वेपसा तुविजात स्तवानः। विश्वेभिर्यद्वावनः शुक्र देवैस्तन्नो रास्व सुमहो भूरि मन्म ॥

वि। साहि। अग्ने। गृणते। मनीषाम्। खम्। वेपसा। तुविऽजात। स्तवानः। विश्वेभिः। यत्। ववनः। शुक्र। देवैः। तत्। नः। रास्व। सुऽमहः। भूरि। मन्म ॥२॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 11 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (तुविजात) बहुतों में प्रसिद्ध (अग्ने) अग्नि के सदृश विद्या से प्रकाशित ! (स्तवानः) स्तुति करनेवाले हुए आप (वेपसा) राज्य के पालन आदि कर्म से (मनीषाम्) मन की नियामक बुद्धि और (खम्) आकाश की (गृणते) स्तुति करनेवाले के लिये (वि) विशेष करके (साहि) कर्मों की समाप्ति करो। हे (शुक्र) शीघ्रता करनेवाले ! (विश्वेभिः) सम्पूर्ण (देवैः) विद्वानों के साथ आप (यत्) जिसे (वावनः) उत्तम प्रकार भजो सेवो (तत्) उस (सुमहः) बहुत बड़े और (भूरि) बहुत (मन्म) विज्ञान को (नः) हम लोगों के लिये (रास्व) दीजिये ॥२॥
Essence
हे राजन् ! आप जितेन्द्रिय हो और बुद्धि को प्राप्त होकर कर्म से प्रारम्भ किये हुए कार्य्य को समाप्त करो और सम्पूर्ण विद्वानों के सहित पूर्ण विज्ञान और प्रजाओं के लिये सुख दीजिये ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥