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Rigveda Mandal 4 / Sukta 10 / Mantra 3

58 Sukta
8 Mantra
4/10/3
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- भुरिग्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए॒भिर्नो॑ अ॒र्कैर्भवा॑ नो अ॒र्वाङ् स्व१॒॑र्ण ज्योतिः॑। अग्ने॒ विश्वे॑भिः सु॒मना॒ अनी॑कैः ॥३॥

ए॒भिः । नः॒ । अ॒र्कैः । भव॑ । नः॒ । अ॒र्वाङ् । स्वः॑ । ण । ज्योतिः॑ । अग्ने॑ । विश्वे॑भिः । सु॒ऽमनाः॑ । अनी॑कैः ॥

Mantra without Swara
एभिर्नो अर्कैर्भवा नो अर्वाङ् स्व१र्ण ज्योतिः। अग्ने विश्वेभिः सुमना अनीकैः ॥

एभिः। नः। अर्कैः। भव। नः। अर्वाङ्। स्वः। न। ज्योतिः। अग्ने। विश्वेभिः। सुऽमनाः। अनीकैः॥३॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 10 Mantra » 3

Bhashya

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Meaning
हे (अग्ने) अग्नि के सदृश तेजस्विन् ! आप (अर्कैः) सत्कार और (एभिः) बुद्धि, बल और साधुओं के सहित (नः) हम लोगों के लिये रक्षक (भव) हूजिये और (अर्वाङ्) अन्य व्यवहार में वर्त्तमान (स्वः) जैसे सूर्य्य के सदृश सुखकारी (न) वैसे (नः) हम लोगों के ऊपर (ज्योतिः) प्रकाशक हूजिये और (सुमनाः) कल्याणकारक मनयुक्त होते हुए (विश्वेभिः) सम्पूर्ण (अनीकैः) शत्रु और दुष्ट डाकुओं से ग्रहण करने को अशक्य सेनाओं से पालनकर्त्ता हूजिये ॥३॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो राजा लोग बल, बुद्धि और सज्जनों से सङ्ग उत्तम रक्षा कर और वृद्धि कराके प्रजा का पालन करते हैं, वे सूर्य्य के सदृश प्रकाशित यशयुक्त सदा आनन्दित होते हैं ॥३॥
Subject
अब प्रजाविषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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