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Rigveda Mandal 4 / Sukta 10 / Mantra 2

58 Sukta
8 Mantra
4/10/2
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- भुरिग्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अधा॒ ह्य॑ग्ने॒ क्रतो॑र्भ॒द्रस्य॒ दक्ष॑स्य सा॒धोः। र॒थीर्ऋ॒तस्य॑ बृह॒तो ब॒भूथ॑ ॥२॥

अध॑ । हि । अ॒ग्ने॒ । क्रतोः॑ । भ॒द्रस्य॑ । दक्ष॑स्य । सा॒धोः । र॒थीः । ऋ॒तस्य॑ । बृ॒ह॒तः । ब॒भूथ॑ ॥

Mantra without Swara
अधा ह्यग्ने क्रतोर्भद्रस्य दक्षस्य साधोः। रथीर्ऋतस्य बृहतो बभूथ ॥

अध। हि। अग्ने। क्रतोः। भद्रस्य। दक्षस्य। साधोः। रथीः। ऋतस्य। बृहतः। बभूथ॥२॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 10 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) राजन् ! (हि) जिस कारण अग्नि के सदृश प्रकाशमान आप हैं, इससे (रथीः) बहुत वाहनों से युक्त होते हुए (भद्रस्य) कल्याणकर्त्ता तथा (दक्षस्य) बल (क्रतोः) बुद्धि और (साधोः) उत्तम मार्ग में वर्त्तमान (ऋतस्य) सत्य, न्याय और (बृहतः) बड़े व्यवहार के रक्षक (बभूथ) हूजिये (अध) इसके अनन्तर हम लोगों के राजा हूजिये ॥२॥
Essence
राजा को चाहिये कि सम्पूर्ण बल और विज्ञान से सज्जनों का रक्षण और दुष्ट पुरुषों का ताड़न करके सत्यन्याय की उन्नति निरन्तर करे ॥२॥
Subject
अब राजविषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥