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Rigveda Mandal 3 / Sukta 8 / Mantra 5

62 Sukta
11 Mantra
3/8/5
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
जा॒तो जा॑यते सुदिन॒त्वे अह्नां॑ सम॒र्य आ वि॒दथे॒ वर्ध॑मानः। पु॒नन्ति॒ धीरा॑ अ॒पसो॑ मनी॒षा दे॑व॒या विप्र॒ उदि॑यर्ति॒ वाच॑म्॥

जा॒तः । जा॒य॒ते॒ । सु॒दि॒न॒ऽत्वे । अह्ना॑म् । स॒ऽम॒र्ये । आ । वि॒दथे॑ । वर्ध॑मानः । पु॒नन्ति॑ । धीराः॑ । अ॒पसः॑ । म॒नी॒षा । दे॒व॒ऽयाः । विप्रः॑ । उत् । इ॒य॒र्ति॒ । वाच॑म् ॥

Mantra without Swara
जातो जायते सुदिनत्वे अह्नां समर्य आ विदथे वर्धमानः। पुनन्ति धीरा अपसो मनीषा देवया विप्र उदियर्ति वाचम्॥

जातः। जायते। सुदिनऽत्वे। अह्नाम्। सऽमर्ये। आ। विदथे। वर्धमानः। पुनन्ति। धीराः। अपसः। मनीषा। देवऽयाः। विप्रः। उत्। इयर्ति। वाचम्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 3 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
जो (समर्ये) युद्ध में शूरवीर पुरुष के समान (अह्नाम्) दिनों के (सुदिनत्वे) सुन्दर दिनों के होने में (विदथे) विज्ञान सम्बन्धी व्यवहार में (जातः) प्रसिद्ध (वर्द्धमानः) बढ़ता हुआ (जायते) उत्पन्न होता है। जो (मनीषा) बुद्धि से (अपसः) कर्मों को करता हुआ (देवयाः) विद्वानों का पूजन करनेवाला नियतात्मा (विप्रः) समस्त विद्याओं से युक्त बुद्धिमान् जन (वाचम्) शुद्ध वाणी को (उत्, इयर्त्ति) प्राप्त होता है उसको (धीराः) बुद्धिमान् जन (आ, पुनन्ति) अच्छे प्रकार पवित्र करते हैं ॥५॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। उन्हीं का सुदिन होता है, जो विद्या और उत्तम शिक्षा का संग्रह कर विद्वान् होते हैं। जैसे शूरवीर पुरुष दुष्टों को जीत के धनादि ऐश्वर्य के साथ सब ओर से बढ़ते हैं, वैसे ही विद्या से विद्वान् बढ़ते हैं ॥५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।