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Rigveda Mandal 3 / Sukta 62 / Mantra 12

62 Sukta
18 Mantra
3/62/12
Devata- सविता Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
दे॒वं नरः॑ सवि॒तारं॒ विप्रा॑ य॒ज्ञैः सु॑वृ॒क्तिभिः॑। न॒म॒स्यन्ति॑ धि॒येषि॒ताः॥

दे॒वम् । नरः॑ । स॒वि॒तार॑म् । विप्राः॑ । य॒ज्ञैः । सु॒वृ॒क्तिऽभिः॑ । न॒म॒स्यन्ति॑ । धि॒या । इ॒षि॒ताः ॥

Mantra without Swara
देवं नरः सवितारं विप्रा यज्ञैः सुवृक्तिभिः। नमस्यन्ति धियेषिताः॥

देवम्। नरः। सवितारम्। विप्राः। यज्ञैः। सुवृक्तिऽभिः। नमस्यन्ति। धिया। इषिताः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 4 Varga » 11 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
जो (धिया) बुद्धि वा कर्म से (इषिताः) प्रेरणा किये गये (नरः) योग से इन्द्रिय और अन्तःकरण के प्राप्त करानेवाले (विप्राः) बुद्धिमान् लोग (सुवृक्तिभिः) उत्तम प्रकार दोषों का काटना जिनमें उन (यज्ञैः) शास्त्र का अभ्यास सत्सङ्ग और योगाभ्यासों से (सवितारम्) सम्पूर्ण संसार के उत्पन्न करने और (देवम्) सुख देनेवाले को (नमस्यन्ति) नमस्कार करते हैं, वे अभीष्टसुखों से सम्पन्न होते हैं ॥१२॥
Essence
जो इन्द्रियों को वश में करनेवाले विद्वान् लोग प्रेम और सत्यभाषणादिस्वरूप धर्म से परमेश्वर की उपासना करते हैं, वे सुख से युक्त होते हैं ॥१२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।