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Rigveda Mandal 3 / Sukta 60 / Mantra 4

62 Sukta
7 Mantra
3/60/4
Devata- ऋभवः Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
इन्द्रे॑ण याथ स॒रथं॑ सु॒ते सचाँ॒ अथो॒ वशा॑नां भवथा स॒ह श्रि॒या। न वः॑ प्रति॒मै सु॑कृ॒तानि॑ वाघतः॒ सौध॑न्वना ऋभवो वी॒र्या॑णि च॥

इन्द्रे॑ण । या॒थ॒ । स॒ऽरथ॑म् । सु॒ते । सचा॑ । अथो॒ इति॑ । वशा॑नाम् । भ॒व॒थ॒ । स॒ह । श्रि॒या । न । वः॒ । प्र॒ति॒ऽमै । सु॒ऽकृ॒तानि॑ । वा॒घ॒तः॒ । सौध॑न्वनाः । ऋ॒भ॒वः॒ । वी॒र्या॑णि च ॥

Mantra without Swara
इन्द्रेण याथ सरथं सुते सचाँ अथो वशानां भवथा सह श्रिया। न वः प्रतिमै सुकृतानि वाघतः सौधन्वना ऋभवो वीर्याणि च॥

इन्द्रेण। याथ। सऽरथम्। सुते। सचा। अथो इति। वशानाम्। भवथ। सह। श्रिया। न। वः। प्रतिऽमै। सुऽकृतानि। वाघतः। सौधन्वनाः। ऋभवः। वीर्याणि च॥

Ashtak » 3 Adhyay » 4 Varga » 7 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (सौधन्वनाः) यथार्थवक्ता पुरुष के पुत्रो ! (वाघतः) विद्वान् (ऋभवः) बुद्धिमान् आप लोग (सुते) उत्पन्न हुए राज्य में (सचा) विज्ञान और (इन्द्रेण) अत्यन्त ऐश्वर्य्य से (सरथम्) रथ के साथ वर्त्तमान सेवा को (याथ) प्राप्त हूजिये, (अथो) इसके अनन्तर (वशानाम्) कामना करने योग्यों की (श्रिया) लक्ष्मी के (सह) साथ (भवथ) हूजिये जिससे (वः) आप लोगों के (सुकृतानि) धर्मयुक्त कर्म्म (वीर्याणि, च) और पराक्रम (प्रतिमै) समान (न) नहीं होवैं ॥४॥
Essence
जो विद्वान् होकर धर्मयुक्त आचरण से प्रयत्न करते हैं, वे लक्ष्मीवान् और अतुल धनों को प्राप्त होकर पराक्रमों को बढ़ाते हैं ॥४॥
Subject
फिर राज्य विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।