Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 59 / Mantra 4

62 Sukta
9 Mantra
3/59/4
Devata- मित्रः Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
अ॒यं मि॒त्रो न॑म॒स्यः॑ सु॒शेवो॒ राजा॑ सुक्ष॒त्रो अ॑जनिष्ट वे॒धाः। तस्य॑ व॒यं सु॑म॒तौ य॒ज्ञिय॒स्यापि॑ भ॒द्रे सौ॑मन॒से स्या॑म॥

अ॒यम् । मि॒त्रः । न॒म॒स्यः॑ । सु॒ऽशेवः॑ । राजा॑ । सु॒ऽक्ष॒त्रः । अ॒ज॒नि॒ष्ट॒ । वे॒धाः । तस्य॑ । व॒यम् । सु॒ऽम॒तौ । य॒ज्ञिय॑स्य । अपि॑ । भ॒द्रे । सौ॒म॒न॒से । स्या॒म॒ ॥

Mantra without Swara
अयं मित्रो नमस्यः सुशेवो राजा सुक्षत्रो अजनिष्ट वेधाः। तस्य वयं सुमतौ यज्ञियस्यापि भद्रे सौमनसे स्याम॥

अयम्। मित्रः। नमस्यः। सुऽशेवः। राजा। सुऽक्षत्रः। अजनिष्ट। वेधाः। तस्य। वयम्। सुऽमतौ। यज्ञियस्य। अपि। भद्रे। सौमनसे। स्याम॥

Ashtak » 3 Adhyay » 4 Varga » 5 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
सबको जो (अयम्) यह परमात्मा वा यथार्थवक्ता राजा (मित्रः) मित्र (सुशेवः) उत्तम सुख का दाता (सुक्षत्रः) वा जिसका राज्यदेश उत्तम प्रकार सुखी (राजा) जो पृथिवी का पालनकर्त्ता (वेधाः) बुद्धिमान् (नमस्यः) और सत्कार करने योग्य है तथा जिसका राज्यदेश सुखी (अजनिष्ट) होता है (तस्य) उस (यज्ञियस्य) सत्यव्यवहार के उत्पन्न करनेवाले की (सुमतौ) आज्ञा वा बुद्धि में तथा (सौमनसे) श्रेष्ठ मानसव्यवहार और (भद्रे) कल्याण करनेवाले व्यवहार में (अपि) भी (वयम्) हम लोग (स्याम) प्रसिद्ध होवैं, वैसे ही सब लोग हों ॥४॥
Essence
जैसे ईश्वर और यथार्थवक्ता पुरुष धर्म में वर्त्तमान हुए नमस्कार करने के योग्य होते हैं, वैसे ही न्याय और विनय से राज्य के पालनकर्त्ता राजा लोग सत्कार करने योग्य होवैं और सज्जन लोग परमेश्वर और यथार्थवक्ताओं के कर्मों में वर्त्तमान हैं, वैसे ही हम लोगों को चाहिये कि वर्त्ताव करें ॥४॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।