Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 58 / Mantra 7

62 Sukta
9 Mantra
3/58/7
Devata- अश्विनौ Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अश्वि॑ना वा॒युना॑ यु॒वं सु॑दक्षा नि॒युद्भि॑श्च स॒जोष॑सा युवाना। नास॑त्या ति॒रोअ॑ह्न्यं जुषा॒णा सोमं॑ पिबतम॒स्रिधा॑ सुदानू॥

अश्वि॑ना । वा॒युना॑ । यु॒वम् । सु॒ऽद॒क्षा॒ । नि॒युत्ऽभिः॑ । च॒ । स॒ऽजोष॑सा । यु॒वा॒ना॒ । नास॑त्या । ति॒रःऽअ॑ह्न्यम् । जु॒षा॒णा । सोम॑म् । पि॒ब॒त॒म् । अ॒स्रिधा॑ । सु॒दा॒नू॒ इति॑ सुऽदानू ॥

Mantra without Swara
अश्विना वायुना युवं सुदक्षा नियुद्भिश्च सजोषसा युवाना। नासत्या तिरोअह्न्यं जुषाणा सोमं पिबतमस्रिधा सुदानू॥

अश्विना। वायुना। युवम्। सुऽदक्षा। नियुत्ऽभिः। च। सऽजोषसा। युवाना। नासत्या। तिरःऽअह्न्यम्। जुषाणा। सोमम्। पिबतम्। अस्रिधा। सुदानू इति सुऽदानू॥

Ashtak » 3 Adhyay » 4 Varga » 4 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (युवाना) यौवनावस्था को प्राप्त (नासत्या) असत्य आचार से रहित (सुदक्षा) उत्तम प्रकार चतुर (सजोषसा) तुल्य प्रीति के सेवनेवाले (तिरोअह्न्यम्) तिर्च्छे दिनों में उत्तम की (जुषाणा) सेवा करते हुए (अस्रिधा) अहिंसक (सुदानू) उत्तमपदार्थ के देने (अश्विना) शिल्पविद्या के पढ़ाने और पढ़नेवाले स्वामी और सेवको ! (युवम्) आप दोनों (वायुना) पवन से (नियुद्भिः, च) नियत किये हुए भी वाहनों में स्थित हो और आकर (सोमम्) बड़ी ओषधि के रस का (पिबतम्) पान कीजिये ॥७॥
Essence
हे मनुष्यो ! आप हिंसा आदि अधर्म व्यवहार को त्याग के वायु बिजुली आदि पदार्थविद्याओं को जान अन्य जनों के लिये विद्या आदि दे और पूर्ण ब्रह्मचर्य्य का सेवन करके अतिकाल जीओ ॥७॥
Subject
अब शिल्पविद्या उपदेशार्थ आज्ञा विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.