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Rigveda Mandal 3 / Sukta 57 / Mantra 4

62 Sukta
6 Mantra
3/57/4
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अच्छा॑ विवक्मि॒ रोद॑सी सु॒मेके॒ ग्राव्णो॑ युजा॒नो अ॑ध्व॒रे म॑नी॒षा। इ॒मा उ॑ ते॒ मन॑वे॒ भूरि॑वारा ऊ॒र्ध्वा भ॑वन्ति दर्श॒ता यज॑त्राः॥

अच्छ॑ । वि॒व॒क्मि॒ । रोद॑सी॒ इति॑ । सु॒मेके॒ इति॑ सु॒ऽमेके॑ । ग्राव्णः॑ । यु॒जा॒नः । अ॒ध्व॒रे । म॒नी॒षा । इ॒माः । ऊँ॒ इति॑ । ते॒ । मन॑वे । भूरि॑ऽवाराः । ऊ॒र्ध्वाः । भ॒व॒न्ति॒ । द॒र्श॒ताः । यज॑त्राः ॥

Mantra without Swara
अच्छा विवक्मि रोदसी सुमेके ग्राव्णो युजानो अध्वरे मनीषा। इमा उ ते मनवे भूरिवारा ऊर्ध्वा भवन्ति दर्शता यजत्राः॥

अच्छ। विवक्मि। रोदसी इति। सुमेके इति सुऽमेके। ग्राव्णः। युजानः। अध्वरे। मनीषा। इमाः। ऊँ इति। ते। मनवे। भूरिऽवाराः। ऊर्ध्वाः। भवन्ति। दर्शताः। यजत्राः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 4 Varga » 2 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो ! इस (अध्वरे) मेल करने योग्य व्यवहार में जो (इमाः) ये प्रजायें (मनीषा) बुद्धि के सहित वर्त्तमान (भूरिवाराः) अनेक प्रकार के सुख को प्राप्त होनेवाली (दर्शताः) देखने तथा (यजत्राः) मेल और सत्कार करने योग्य (ऊर्ध्वाः) उत्तम (भवन्ति) होती हैं उनको (युजानः) प्राप्त होते हुए आप लोग (ग्राव्णः) मेघ के सदृश संयोग से सुखी होते हैं और जो स्त्री पुरुष (सुमेके) उत्तम प्रकार एक हुए (रोदसी) अन्तरिक्ष और पृथिवी के तुल्य (ते) आप (मनवे) मनुष्य के लिये वर्त्तमान हैं उन दोनों और उन आप लोगों के प्रति (उ) आश्चर्य के साथ मैं (अच्छ) उत्तम प्रकार (विवक्मि) विशेष करके उपदेश देता हूँ ॥४॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो स्त्री और पुरुष पृथिवी और सूर्य के सदृश संयुक्त हुए वर्त्तमान हैं, वे भाग्यशाली होते हैं। जो स्त्री और पुरुष उत्तम प्रकार परीक्षा करके स्वयंवर विवाह को करैं, वे मेघ के सदृश उत्तम सन्तानों को उत्पन्न करके सब काल में सुखी होते हैं ॥४॥
Subject
अब स्त्रीपुरुषों के कृत्य का अगले मन्त्र में उपदेश करते हैं।