Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 55 / Mantra 5

62 Sukta
22 Mantra
3/55/5
Devata- विश्वेदेवा, अग्निः Rishi- प्रजापतिर्वैश्वामित्रो वाच्यो वा Chhanda- स्वराट्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
आ॒क्षित्पूर्वा॒स्वप॑रा अनू॒रुत्स॒द्यो जा॒तासु॒ तरु॑णीष्व॒न्तः। अ॒न्तर्व॑तीः सुवते॒ अप्र॑वीता म॒हद्दे॒वाना॑मसुर॒त्वमेक॑म्॥

आ॒ऽक्षित् । पूर्वा॑सु । अप॑राः । अ॒नू॒रुत् । स॒द्यः । जा॒तासु॑ । तरु॑णीषु । अ॒न्तरिति॑ । अ॒न्तःऽव॑तीः । सु॒व॒ते॒ । अप्र॑वीताः । म॒हत् । दे॒वाना॑म् । अ॒सु॒र॒ऽत्वम् । एक॑म् ॥

Mantra without Swara
आक्षित्पूर्वास्वपरा अनूरुत्सद्यो जातासु तरुणीष्वन्तः। अन्तर्वतीः सुवते अप्रवीता महद्देवानामसुरत्वमेकम्॥

आऽक्षित्। पूर्वासु। अपराः। अनूरुत्। सद्यः। जातासु। तरुणीषु। अन्तरिति। अन्तःऽवतीः। सुवते। अप्रवीताः। महत्। देवानाम्। असुरऽत्वम्। एकम्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 3 Varga » 28 Mantra » 5

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जो (पूर्वासु) प्राचीनकाल में विद्यमान और (सद्यः) समान दिन में (जातासु) उत्पन्न और (तरुणीषु) युवावस्थावालियों के सदृश वर्त्तमान प्रजाओं के (अन्तः) मध्य में (आक्षित्) जो चारों ओर सर्वत्र वसता है वह (अनूरुत्) उपदेश देनेवाला वर्त्तमान है ओर जिसके उत्पन्न करने से (अपराः) उत्पन्न की जातीं (अन्तर्वतीः) मध्य में कारण विद्यमान है जिनमें उन (अप्रवीताः) नहीं व्याप्त अर्थात् गणना से नाप सकने योग्य प्रजा (सुवते) उत्पन्न होती हैं वही (देवानाम्) उत्तम गुणवाले सूर्य्य आदिकों के मध्य में (महत्) सबसे बड़े (असुरत्वम्) सबके फेंकनेवाले और (एकम्) चेतनमात्र स्वरूप परमात्मा की आप लोग सेवा करो ॥५॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो उत्पन्न, उत्पन्न हो गई और उत्पन्न होनेवाली प्रजाओं में व्याप्त धारण करनेवाला अन्तर्यामी वर्त्तमान है, उस परमात्मा की सेवा करो ॥५॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.