Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 55 / Mantra 4

62 Sukta
22 Mantra
3/55/4
Devata- विश्वेदेवा, अग्निः Rishi- प्रजापतिर्वैश्वामित्रो वाच्यो वा Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स॒मा॒नो राजा॒ विभृ॑तः पुरु॒त्रा शये॑ श॒यासु॒ प्रयु॑तो॒ वनानु॑। अ॒न्या व॒त्सं भर॑ति॒ क्षेति॑ मा॒ता म॒हद्दे॒वाना॑मसुर॒त्वमेक॑म्॥

स॒मा॒नः । राजा॑ । विऽभृ॑तः । पु॒रु॒ऽत्रा । शये॑ । श॒यासु॑ । प्रऽयु॑तः । वना॑ । अनु॑ । अ॒न्या । व॒त्सम् । भर॑ति । क्षेति॑ । मा॒ता । म॒हत् । दे॒वाना॑म् । अ॒सु॒र॒ऽत्वम् । एक॑म् ॥

Mantra without Swara
समानो राजा विभृतः पुरुत्रा शये शयासु प्रयुतो वनानु। अन्या वत्सं भरति क्षेति माता महद्देवानामसुरत्वमेकम्॥

समानः। राजा। विऽभृतः। पुरुऽत्रा। शये। शयासु। प्रऽयुतः। वना। अनु। अन्या। वत्सम्। भरति। क्षेति। माता। महत्। देवानाम्। असुरऽत्वम्। एकम्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 3 Varga » 28 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जिन (पुरुत्रा) प्राचीन काल से प्रसिद्ध (शयासु) शयन करें जिनमें बिजुली आदि पदार्थ उनमें (प्रयुतः) विभक्त हुआ फिर मिल गया (विभृतः) विशेष करके धारण किया गया (समानः) एक (राजा) प्रकाशमान सूर्य्य (शये) शयन करता है (वना) किरणों को सेवन करता है (अन्या) भिन्न त्रिगुण स्वरूप प्रकृति (माता) माता (वत्सम्) पुत्र को धारण करती है और सबको (क्षेति) वसाती है वह (देवानाम्) सूर्य्यादिक वा विद्वानों के मध्य में (महत्) सत्कार करने योग्य (एकम्) द्वितीय रहित (असुरत्वम्) दूर करता है दुःखों को जो उसका होना उसको आप लोग (अनु) शीघ्र जानिये ॥४॥
Essence
हे मनुष्यो ! जिस करके प्रकाशित हुए सूर्य्य आदि प्रकाशित होते हैं, जो अव्यक्त अर्थात् प्रकृति में सबको उत्पन्न करके तथा धारण करके माता के सदृश रक्षा करता है और जो यथार्थवक्ता विद्वानों करके सत्कार करने योग्य है, उस ब्रह्म की आप लोग उपासना करो ॥४॥