Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 55 / Mantra 1

62 Sukta
22 Mantra
3/55/1
Devata- विश्वेदेवा, उषा Rishi- प्रजापतिर्वैश्वामित्रो वाच्यो वा Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
उ॒षसः॒ पूर्वा॒ अध॒ यद्व्यू॒षुर्म॒हद्वि ज॑ज्ञे अ॒क्षरं॑ प॒दे गोः। व्र॒ता दे॒वाना॒मुप॒ नु प्र॒भूष॑न्म॒हद्दे॒वाना॑मसुर॒त्वमेक॑म्॥

उ॒षसः॑ । पूर्वाः॑ । अध॑ । यत् । वि॒ऽऊ॒षुः । म॒हत् । वि । ज॒ज्ञे॒ । अ॒क्षर॑म् । प॒दे । गोः । व्र॒ता । दे॒वाना॑म् । उप॑ । नु । प्र॒ऽभूष॑न् । म॒हत् । दे॒वाना॑म् । अ॒सु॒र॒ऽत्वम् । एक॑म् ॥

Mantra without Swara
उषसः पूर्वा अध यद्व्यूषुर्महद्वि जज्ञे अक्षरं पदे गोः। व्रता देवानामुप नु प्रभूषन्महद्देवानामसुरत्वमेकम्॥

उषसः। पूर्वाः। अध। यत्। विऽऊषुः। महत्। वि। जज्ञे। अक्षरम्। पदे। गोः। व्रता। देवानाम्। उप। नु। प्रऽभूषन्। महत्। देवानाम्। असुरऽत्वम्। एकम्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 3 Varga » 28 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(यत्) जो (उषसः) प्रातःकाल से (पूर्वाः) प्रथम हुए (व्यूषुः) विशेष करके वसते हैं वह (महत्) बड़ा (अक्षरम्) नहीं नाश होनेवाला (महत्) बड़ा तत्त्वनामक (गोः) पृथिवी के (पदे) स्थान में (वि, जज्ञे) उत्पन्न हुआ जो (एकम्) अद्वितीय और सहायरहित (देवानाम्) पृथिवी आदिकों में बड़े (असुरत्वम्) प्राणों में रमनेवाले को (प्र, भूषन्) शोभित करता हुआ (अध) उसके अनन्तर (देवानाम्) विद्वानों के (व्रता) नियम (उप) समीप में (नु) शीघ्र उत्पन्न हुए, उसको आप लोग जानिये ॥१॥
Essence
जो बिजुली नामक वस्तु को प्रातःकाल से सेवन करते हैं, उनके सदृश वर्त्तमान एक द्वितीयरहित ब्रह्म प्रकृति आदि पदार्थों में व्याप्त हुआ वह सबको धारण करता है, वही सब करके उपासना करने योग्य है ॥१॥
Subject
अब बाईस ऋचावाले पचपनवें सूक्त का आरम्भ है।