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Rigveda Mandal 3 / Sukta 54 / Mantra 5

62 Sukta
22 Mantra
3/54/5
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- प्रजापतिर्वैश्वामित्रो वाच्यो वा Chhanda- स्वराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
को अ॒द्धा वे॑द॒ क इ॒ह प्र वो॑चद्दे॒वाँ अच्छा॑ प॒थ्या॒३॒॑ का समे॑ति। ददृ॑श्र एषामव॒मा सदां॑सि॒ परे॑षु॒ या गुह्ये॑षु व्र॒तेषु॑॥

कः । अ॒द्धा । वे॒द॒ । कः । इ॒ह । प्र । वो॒च॒त् । दे॒वान् । अच्छ॑ । प॒थ्या॑ । का । सम् । ए॒ति॒ । ददृ॑श्रे । ए॒षा॒म् । अ॒व॒मा । सदां॑सि । परे॑षु । या । गुह्ये॑षु । व्र॒तेषु॑ ॥

Mantra without Swara
को अद्धा वेद क इह प्र वोचद्देवाँ अच्छा पथ्या३ का समेति। ददृश्र एषामवमा सदांसि परेषु या गुह्येषु व्रतेषु॥

कः। अद्धा। वेद। कः। इह। प्र। वोचत्। देवान्। अच्छ। पथ्या। का। सम्। एति। ददृश्रे। एषाम्। अवमा। सदांसि। परेषु। या। गुह्येषु। व्रतेषु॥

Ashtak » 3 Adhyay » 3 Varga » 24 Mantra » 5

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Meaning
हे मनुष्यो ! (इह) इस विज्ञान में परमात्मा और धर्म को (अद्धा) साक्षात् (कः) कौन (वेद) जाने और (कः) कौन पुरुष (देवान्) विद्वानों को (अच्छ) उत्तम प्रकार (प्र, वोचत्) उपदेश देवे (का) कौन (पथ्या) उत्तम मार्ग से युक्त (देवान्) विद्वानों को (सम्, एति) प्राप्त होती है और (एषाम्) इन विद्वानों के (परेषु) सूक्ष्मों को (अवमा) नीचे भाग में वर्त्तमान (सदांसि) वस्तुएँ (गुह्येषु) गुप्त अर्थात् रक्षा करने योग्य (व्रतेषु) सत्यभाषण आदि नियमों में (या) जो ज्ञान और सत्यभाषण आदिकों को (ददृश्रे) देखें, वे पूर्वोक्त सम्पूर्ण को जानें ॥५॥
Essence
इस संसार में विरला ही ऐसा मनुष्य होता है कि जो परमात्मा को जान और उसकी आज्ञा के अनुकूल आचरण स्वीकार करके सत्य का उपदेश देता है, ऐसा कोई विद्वान् जो इस संसार में इस लोक और परलोक का ज्ञाता होवे ॥५॥
Subject
अब विद्वान् के विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।

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