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Rigveda Mandal 3 / Sukta 54 / Mantra 20

62 Sukta
22 Mantra
3/54/20
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- प्रजापतिर्वैश्वामित्रो वाच्यो वा Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
शृ॒ण्वन्तु॑ नो॒ वृष॑णः॒ पर्व॑तासो ध्रु॒वक्षे॑मास॒ इळ॑या॒ मद॑न्तः। आ॒दि॒त्यैर्नो॒ अदि॑तिः शृणोतु॒ यच्छ॑न्तु नो म॒रुतः॒ शर्म॑ भ॒द्रम्॥

शृ॒ण्वन्तु॑ । नः॒ । वृष॑णः । पर्व॑तासः । ध्रु॒वऽक्षे॑मासः । इळ॑या । मद॑न्तः । आ॒दि॒त्यैः । नः॒ । अदि॑तिः । शृ॒णो॒तु॒ । यच्छ॑न्तु । नः॒ । म॒रुतः॑ । शर्म॑ । भ॒द्रम् ॥

Mantra without Swara
शृण्वन्तु नो वृषणः पर्वतासो ध्रुवक्षेमास इळया मदन्तः। आदित्यैर्नो अदितिः शृणोतु यच्छन्तु नो मरुतः शर्म भद्रम्॥

शृण्वन्तु। नः। वृषणः। पर्वतासः। ध्रुवऽक्षेमासः। इळया। मदन्तः। आदित्यैः। नः। अदितिः। शृणोतु। यच्छन्तु। नः। मरुतः। शर्म। भद्रम्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 3 Varga » 27 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो ! आप लोग (इळया) प्रशंसित वाणी के सहित वर्त्तमान (नः) हम लोगों कीर्त्तिमानों को (शृण्वन्तु) सुनो (वृषणः) वृष्टि करनेवाले (ध्रुवक्षेमासः) निश्चित रक्षा है जिनसे वे (पर्वतासः) मेघ जैसे वैसे हम लोगों की (मदन्तः) प्रसन्न हुए वृद्धि कर और (आदित्यैः) पूर्ण विद्वानों के साथ (अदितिः) माता (नः) हम लोगों को (शृणोतु) सुने (मरुतः) मनुष्य लोग (नः) हम लोगों के लिये (भद्रम्) कल्याण करनेवाले (शर्म) श्रेष्ठ गृह के सदृश सुख को (यच्छन्तु) देवें ॥२०॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि सब प्राप्तियों से प्रथम उत्तम शिक्षा तदनन्तर विद्या पुनः सत्सङ्ग से कल्याणकारक आचरण उत्तम बातों का श्रवण और उपदेश करके सबके योग्य अर्थात् भोजन आच्छादन के निर्वाह और कल्याण को सिद्ध करें ॥२०॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।