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Rigveda Mandal 3 / Sukta 54 / Mantra 16

62 Sukta
22 Mantra
3/54/16
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- प्रजापतिर्वैश्वामित्रो वाच्यो वा Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
नास॑त्या मे पि॒तरा॑ बन्धु॒पृच्छा॑ सजा॒त्य॑म॒श्विनो॒श्चारु॒ नाम॑। यु॒वं हि स्थो र॑यि॒दौ नो॑ रयी॒णां दा॒त्रं र॑क्षेथे॒ अक॑वै॒रद॑ब्धा॥

नास॑त्या । मे॒ । पि॒तरा॑ । ब॒न्धु॒ऽपृच्छा॑ । स॒ऽजा॒त्य॑म् । अ॒श्विनोः॑ । चारु॑ । नाम॑ । यु॒वम् । हि । स्थः । र॒यि॒ऽदौ । नः॒ । र॒यी॒णाम् । दा॒त्रम् । र॒क्षे॒थे॒ इति॑ । अक॑वैः । अद॑ब्धा ॥

Mantra without Swara
नासत्या मे पितरा बन्धुपृच्छा सजात्यमश्विनोश्चारु नाम। युवं हि स्थो रयिदौ नो रयीणां दात्रं रक्षेथे अकवैरदब्धा॥

नासत्या। मे। पितरा। बन्धुऽपृच्छा। सऽजात्यम्। अश्विनोः। चारु। नाम। युवम्। हि। स्थः। रयिऽदौ। नः। रयीणाम्। दात्रम्। रक्षेथे इति। अकवैः। अदब्धा॥

Ashtak » 3 Adhyay » 3 Varga » 27 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे सभा और सेना के स्वामी ! (युवम्) आप दोनों (हि) जिससे कि (नः) हम लोगों के लिये (रयिदौ) लक्ष्मी देनेवाले (रयीणाम्) धनों के (दात्रम्) दान की (रक्षेथे) रक्षा करते हैं (अकवैः) कुत्सित भिन्न अर्थात् उत्तम कर्मों से (अदब्धा) नहीं हिंसित हुए (स्थः) होते हैं और जिनकी (अश्विनोः) सूर्य चन्द्रमा के तुल्य (चारु) सुन्दर (नाम) संज्ञा है उन (बन्धुपृच्छा) बन्धुओं का कुशलादि पूछनेवाले (नासत्या) असत्य के त्यागी (मे) मेरे (पितरा) पालन करनेवालों के सदृश (सजात्यम्) समान जातिवाले सुन्दर नाम की रक्षा करो ॥१६॥
Essence
जो विद्वान् लोग माता और पिता के सदृश सबके लिये विद्या और धन देनेवाले धर्मपूर्वक आचरण करते हुए अपने समान जातिवाले तथा अन्य जनों की रक्षा करते हैं, वे सबके पूजा करने योग्य होते हैं ॥१६॥
Subject
अब विद्वान् के विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।