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Rigveda Mandal 3 / Sukta 54 / Mantra 13

62 Sukta
22 Mantra
3/54/13
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- प्रजापतिर्वैश्वामित्रो वाच्यो वा Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
वि॒द्युद्र॑था म॒रुत॑ ऋष्टि॒मन्तो॑ दि॒वो मर्या॑ ऋ॒तजा॑ता अ॒यासः॑। सर॑स्वती शृणवन्य॒ज्ञिया॑सो॒ धाता॑ र॒यिं स॒हवी॑रं तुरासः॥

वि॒द्युत्ऽर॑थाः । म॒रुतः॑ । ऋ॒ष्टि॒ऽमन्तः॑ । दि॒वः । मर्याः॑ । ऋ॒तऽजा॑ताः । अ॒यासः॑ । सर॑स्वती । शृ॒ण॒व॒न् । य॒ज्ञिया॑सः । धात॑ । र॒यिम् । स॒हऽवी॑रम् । तु॒रा॒सः॒ ॥

Mantra without Swara
विद्युद्रथा मरुत ऋष्टिमन्तो दिवो मर्या ऋतजाता अयासः। सरस्वती शृणवन्यज्ञियासो धाता रयिं सहवीरं तुरासः॥

विद्युत्ऽरथाः। मरुतः। ऋष्टिऽमन्तः। दिवः। मर्याः। ऋतऽजाताः। अयासः। सरस्वती। शृणवन्। यज्ञियासः। धात। रयिम्। सहऽवीरम्। तुरासः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 3 Varga » 26 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
(सरस्वती) विद्यायुक्त स्त्री जिस (सहवीरम्) वीर पुरुषों के सहित वर्त्तमान (रयिम्) धन को (विद्युद्रथाः) बिजुली से युक्त हैं वाहन जिनके वे (मरुतः) मरण धर्मवाले (ऋष्टिमन्तः) बहुत गतियों से युक्त (दिवस्य) कामना करते हुए के सम्बन्धी (मर्य्याः) मनुष्य (ऋतजाताः) सत्य से प्रसिद्ध (अयासः) विद्याओं को प्राप्त (यज्ञियासः) शिल्प व्यवहार के करनेवाले (तुरासः) शीघ्रकर्त्ता विद्वान् लोग (शृणवत्) सुनो और (धात) धारण करो, वैसे इसको सुने और धारण करे ॥१३॥
Essence
जैसे पुरुष लोग विद्या का अभ्यास करें, वैसे ही स्त्रियाँ भी करके लक्ष्मीयुक्त हों। दोनों स्त्री और पुरुष आलस्य का त्याग करके शिल्पविषयक संपूर्ण कर्मों को सिद्ध करो ॥१३॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।