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Rigveda Mandal 3 / Sukta 53 / Mantra 13

62 Sukta
24 Mantra
3/53/13
Devata- इन्द्र: Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वि॒श्वामि॑त्रा अरासत॒ ब्रह्मेन्द्रा॑य व॒ज्रिणे॑। कर॒दिन्नः॑ सु॒राध॑सः॥

वि॒श्वामि॑त्राः । अ॒रा॒स॒त॒ । ब्रह्म॑ । इन्द्रा॑य । व॒ज्रिणे॑ । कर॑त् । इत् । नः॒ । सु॒ऽराध॑सः ॥

Mantra without Swara
विश्वामित्रा अरासत ब्रह्मेन्द्राय वज्रिणे। करदिन्नः सुराधसः॥

विश्वामित्राः। अरासत। ब्रह्म। इन्द्राय। वज्रिणे। करत्। इत्। नः। सुऽराधसः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 3 Varga » 21 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (विश्वामित्राः) सबके मित्रो ! आप लोग जो (नः) हम लोगों को (सुराधसः) उत्तम धन से युक्त (करत्) करे उस (इत्) ही (वज्रिणे) धनुर्वेद के जाननेवाले (इन्द्राय) राजा के लिये (ब्रह्म) धन की (अरासत) वृद्धि करें ॥१३॥
Essence
जो राजा संपूर्ण प्रजाओं को सुखयुक्त करे, उस ही को प्रजा अत्यन्त ऐश्वर्य्य से युक्त करें ॥१३॥
Subject
अब प्रजा के विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।