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Rigveda Mandal 3 / Sukta 51 / Mantra 10

62 Sukta
12 Mantra
3/51/10
Devata- इन्द्र: Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- यवमध्यागायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ॒दं ह्यन्वोज॑सा सु॒तं रा॑धानां पते। पिबा॒ त्व१॒॑स्य गि॑र्वणः॥

इ॒दम् । हि । अनु॑ । ओज॑सा । सु॒तम् । रा॒धा॒ना॒म् । प॒ते॒ । पिब॑ । तु । अ॒स्य । गि॒र्व॒णः॒ ॥

Mantra without Swara
इदं ह्यन्वोजसा सुतं राधानां पते। पिबा त्व१स्य गिर्वणः॥

इदम्। हि। अनु। ओजसा। सुतम्। राधानाम्। पते। पिब। तु। अस्य। गिर्वणः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 3 Varga » 16 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (गिर्वणः) प्रार्थित हुए (राधानाम्) धनों के (पते) पालन करनेवाले ! आप (ओजसा) बल से (अस्य) इसके (इदम्) इस (सुतम्) सिद्ध किये गये सोमलतारूप रस का (पिब) पान कीजिये (हि) निश्चय से और पान करने की इच्छा से इस सोमलता का पान करो ॥१०॥
Essence
हे राजन् ! आप निश्चय सब काल में धन और ऐश्वर्य की रक्षा करके और जो प्राप्त राज्य उसकी देखभाल से वृद्धि करके सुखी होइये ॥१०॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।