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Rigveda Mandal 3 / Sukta 41 / Mantra 6

62 Sukta
9 Mantra
3/41/6
Devata- इन्द्र: Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स म॑न्दस्वा॒ ह्यन्ध॑सो॒ राध॑से त॒न्वा॑ म॒हे। न स्तो॒तारं॑ नि॒दे क॑रः॥

सः । म॒न्द॒स्व॒ । हि । अन्ध॑सः । राध॑से । त॒न्वा॑ । म॒हे । न । स्तो॒तार॑म् । नि॒दे । क॒रः॒ ॥

Mantra without Swara
स मन्दस्वा ह्यन्धसो राधसे तन्वा महे। न स्तोतारं निदे करः॥

सः। मन्दस्व। हि। अन्धसः। राधसे। तन्वा। महे। न। स्तोतारम्। निदे। करः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 3 Varga » 4 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वान् पुरुष ! (हि) जिससे आप (स्तोतारम्) विद्वान् पुरुष की (निदे) निन्दा करने के लिये (न) नहीं (करः) करें इससे (सः) वह आप (तन्वा) शरीर से (अन्धसः) अन्न आदि की (महे) बड़ी (राधसे) सिद्धि करनेवाले धन के लिये (मन्दस्व) आनन्द करो ॥६॥
Essence
जो मनुष्य स्तुति करने योग्य पुरुषों की निन्दा नहीं करते, वे बड़े ऐश्वर्य को प्राप्त होकर शरीर और आत्मा से सदा ही सुखी होते हैं ॥६॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।