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Rigveda Mandal 3 / Sukta 41 / Mantra 5

62 Sukta
9 Mantra
3/41/5
Devata- इन्द्र: Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
म॒तयः॑ सोम॒पामु॒रुं रि॒हन्ति॒ शव॑स॒स्पति॑म्। इन्द्रं॑ व॒त्सं न मा॒तरः॑॥

म॒तयः॑ । सो॒म॒ऽपाम् । उ॒रुम् । रि॒हन्ति॑ । शव॑सः । पति॑म् । इन्द्र॑म् । व॒त्सम् । न । मा॒तरः॑ ॥

Mantra without Swara
मतयः सोमपामुरुं रिहन्ति शवसस्पतिम्। इन्द्रं वत्सं न मातरः॥

मतयः। सोमऽपाम्। उरुम्। रिहन्ति। शवसः। पतिम्। इन्द्रम्। वत्सम्। न। मातरः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 3 Varga » 3 Mantra » 5

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Meaning
जो (मतयः) उत्तम बुद्धि से युक्त मनुष्य लोग (शवसः) बल के (पतिम्) पालन करनेवाले (उरुम्) बहुत ऐश्वर्य्य से पूर्ण (सोमपाम्) ऐश्वर्य्य के रक्षक (इन्द्रम्) ऐश्वर्य्य से युक्त पुरुष (मातरः) गौवें (वत्सम्) बछड़े को (न) जैसे (रिहन्ति) चाटती वैसे मिलते हैं, वे सुख को प्राप्त होते हैं ॥५॥
Essence
जैसे गौवें प्रेमभाव का आश्रयण करके बछड़ों में प्रेम धारण करती हैं, वैसे ही राजा आदि अध्यक्ष पुरुष सेनाओं की प्रजाओं के प्रेमभाव से रक्षा करें ॥५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।

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