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Rigveda Mandal 3 / Sukta 41 / Mantra 4

62 Sukta
9 Mantra
3/41/4
Devata- इन्द्र: Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
रा॒र॒न्धि सव॑नेषु ण ए॒षु स्तोमे॑षु वृत्रहन्। उ॒क्थेष्वि॑न्द्र गिर्वणः॥

र॒र॒न्धि । सव॑नेषु । नः॒ । ए॒षु । स्तोमे॑षु । वृ॒त्र॒ह॒न् । उ॒क्थेषु॑ । इ॒न्द्र॒ । गि॒र्व॒णः॒ ॥

Mantra without Swara
रारन्धि सवनेषु ण एषु स्तोमेषु वृत्रहन्। उक्थेष्विन्द्र गिर्वणः॥

ररन्धि। सवनेषु। नः। एषु। स्तोमेषु। वृत्रहन्। उक्थेषु। इन्द्र। गिर्वणः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 3 Varga » 3 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (गिर्वणः) वाणियों से जिससे याचना करें वह (वृत्रहन्) धनों से युक्त (इन्द्र) अत्यन्त ऐश्वर्य्य के देनेवाले ! आप (स्तोमेषु) प्रशंसा करने और (उक्थेषु) कहने को योग्य (सवनेषु) ऐश्वर्य्यों में (नः) हम लोगों को (रारन्धि) रमाओ ॥४॥
Essence
दरिद्र लोगों को चाहिये कि धनयुक्त पुरुषों से सदा याचना करें, जिससे कि वे दरिद्र लोग सुख को प्राप्त होवें ॥४॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।