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Rigveda Mandal 3 / Sukta 40 / Mantra 6

62 Sukta
9 Mantra
3/40/6
Devata- इन्द्र: Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
गिर्व॑णः पा॒हि नः॑ सु॒तं मधो॒र्धारा॑भिरज्यसे। इन्द्र॒ त्वादा॑त॒मिद्यशः॑॥

गिर्व॑णः । पा॒हि । नः॒ । सु॒तम् । मधोः॑ । धारा॑भिः । अ॒ज्य॒से॒ । इन्द्र॑ । त्वाऽदा॑तम् । इत् । यशः॑ ॥

Mantra without Swara
गिर्वणः पाहि नः सुतं मधोर्धाराभिरज्यसे। इन्द्र त्वादातमिद्यशः॥

गिर्वणः। पाहि। नः। सुतम्। मधोः। धाराभिः। अज्यसे। इन्द्र। त्वाऽदातम्। इत्। यशः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 3 Varga » 2 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे (गिर्वणः) वाणियों से याचना किये जाते (इन्द्र) तेजस्विन् ! जो (त्वादातम्, इत्) आपसे ग्रहण किया हुआ ही (यशः) रोगनाशक जल अन्न वा धन है उससे और (मधोः) मधुर आदि गुणों से युक्त वस्तु के (धाराभिः) प्रवाहों के साथ (सुतम्) उत्पन्न हुए (सोमम्) ओषधि आदि पदार्थ को पाये हुए हम लोगों से जाने जाते हो, वह आप (नः) हमारी (पाहि) रक्षा कीजिये ॥६॥
Essence
हे राजन् ! जितना पीने योग्य वस्तु अन्न और धन हम लोगों का आपने स्वीकार किया है, उससे अपनी और हम लोगों की रक्षा कीजिये ॥६॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।