Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 4 / Mantra 5

62 Sukta
11 Mantra
3/4/5
Devata- आप्रियः Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स॒प्त हो॒त्राणि॒ मन॑सा वृणा॒ना इन्व॑न्तो॒ विश्वं॒ प्रति॑ यन्नृ॒तेन॑। नृ॒पेश॑सो वि॒दथे॑षु॒ प्र जा॒ता अ॒भी॒३॒॑मं य॒ज्ञं वि च॑रन्त पू॒र्वीः॥

स॒प्त । हो॒त्राणि॑ । मन॑सा । वृ॒णा॒नाः । इन्व॑न्तः । विश्व॑म् । प्रति॑ । य॒न् । ऋ॒तेन॑ । नृ॒ऽपेश॑सः । वि॒दथे॑षु । प्र । जा॒ताः । अ॒भि । इ॒मम् । य॒ज्ञम् । वि । च॒र॒न्त॒ । पू॒र्वीः ॥

Mantra without Swara
सप्त होत्राणि मनसा वृणाना इन्वन्तो विश्वं प्रति यन्नृतेन। नृपेशसो विदथेषु प्र जाता अभी३मं यज्ञं वि चरन्त पूर्वीः॥

सप्त। होत्राणि। मनसा। वृणानाः। इन्वन्तः। विश्वम्। प्रति। यन्। ऋतेन। नृऽपेशसः। विदथेषु। प्र। जाताः। अभि। इमम्। यज्ञम्। वि। चरन्त। पूर्वीः॥

Ashtak » 2 Adhyay » 8 Varga » 22 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो (विदथेषु) यज्ञों में (प्रजाताः) उत्पन्न हुए (नृपेशसः) मनुष्यों के रूप के समान जिनका रूप वे पदार्थ (मनसा) विज्ञान से (सप्तहोत्राणि) सात प्रकार के हवन सम्बन्धी कामों को (वृणानाः) स्वीकार करते और (विश्वम्) समस्त जगत् को (इन्वन्तः) व्याप्त होते हुए (ऋतेन) जल के साथ (इमम्) इस (यज्ञम्) यज्ञ को (अभि) सब ओर से जिससे विश्व को (प्रतियन्) प्रतीति से प्राप्त होते हैं तथा (पूर्वीः) पूर्व सिद्ध हुई आहुतियाँ (विचरन्त) विशेषता से प्राप्त होतीं वह यज्ञ सब विद्वानों को करने योग्य है ॥५॥
Essence
जो मनुष्य सुगन्ध्यादियुक्त पदार्थों के अग्नि में छोड़ने से वायु, वृष्टि, जल, ओषधि और अन्नों को अच्छे प्रकार शोधें, तो सब आरोग्यपन को प्राप्त हों ॥५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।