Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 39 / Mantra 8

62 Sukta
9 Mantra
3/39/8
Devata- इन्द्र: Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
ज्योति॑र्य॒ज्ञाय॒ रोद॑सी॒ अनु॑ ष्यादा॒रे स्या॑म दुरि॒तस्य॒ भूरेः॑। भूरि॑ चि॒द्धि तु॑ज॒तो मर्त्य॑स्य सुपा॒रासो॑ वसवो ब॒र्हणा॑वत्॥

ज्योतिः॑ । य॒ज्ञाय॑ । रोद॑सी॒ इति॑ । अनु॑ । स्या॒त् । आ॒रे । स्या॒म॒ । दुः॒ऽइ॒तस्य॑ । भूरेः॑ । भूरि॑ । चि॒त् । हि । तु॒ज॒तः । मर्त्य॑स्य । सु॒ऽपा॒रासः॑ । व॒स॒वः॒ । ब॒र्हणा॑ऽवत् ॥

Mantra without Swara
ज्योतिर्यज्ञाय रोदसी अनु ष्यादारे स्याम दुरितस्य भूरेः। भूरि चिद्धि तुजतो मर्त्यस्य सुपारासो वसवो बर्हणावत्॥

ज्योतिः। यज्ञाय। रोदसी इति। अनु। स्यात्। आरे। स्याम। दुःऽइतस्य। भूरेः। भूरि। चित्। हि। तुजतः। मर्त्यस्य। सुऽपारासः। वसवः। बर्हणाऽवत्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 2 Varga » 26 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (सुपारासः) सुन्दर विद्या का पार है जिनका और (वसवः) विद्याओं में स्वयं वसते वा अन्य जनों को वसाते वह हम लोग (यज्ञाय) विद्वानों के सत्कार आदि अनुष्ठान के लिये (रोदसी) भूमि और प्रकाश के सदृश विद्या और नीति को (आरे) दूर वा समीप में (दुरितस्य) दुःख से प्राप्त हुए (भूरेः) बहुत का (भूरि) बहुत (चित्) भी (तुजतः) बलवान् (मर्त्यस्य) मनुष्य का (बर्हणावत्) वृद्धिकारक विज्ञान वा धन जिसमें विद्यमान ऐसा (ज्योतिः) सूर्य के प्रकाश के सदृश विज्ञान का प्रकाश (स्यात्) होवे ऐसी कामना करते हुए (अनु) पीछे (स्याम) होवें वैसे (हि) ही आप हूजिये ॥८॥
Essence
वे ही श्रेष्ठ पुरुष हैं, जो लोग दूर और समीप में वर्त्तमान पुरुषों में कृपा का अनुसन्धान विद्या और उपदेश का प्रचार करके बड़े कठिन बोध की सरलता को उत्पन्न करें, वे ही सब लोगों को सत्कार करने योग्य होवें ॥८॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.