Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 38 / Mantra 9

62 Sukta
10 Mantra
3/38/9
Devata- इन्द्र: Rishi- प्रजापतिः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
यु॒वं प्र॒त्नस्य॑ साधथो म॒हो यद्दैवी॑ स्व॒स्तिः परि॑ णः स्यातम्। गो॒पाजि॑ह्वस्य त॒स्थुषो॒ विरू॑पा॒ विश्वे॑ पश्यन्ति मा॒यिनः॑ कृ॒तानि॑॥

यु॒वम् । प्र॒त्नस्य॑ । सा॒ध॒थः॒ । म॒हः । यत् । दैवी॑ । स्व॒स्तिः । परि॑ । नः॒ । स्या॒त॒म् । गो॒पाजि॑ह्वस्य । त॒स्थुषः॑ । विऽरू॑पा । विश्वे॑ । प॒श्य॒न्ति॒ । मा॒यिनः॑ । कृ॒तानि॑ ॥

Mantra without Swara
युवं प्रत्नस्य साधथो महो यद्दैवी स्वस्तिः परि णः स्यातम्। गोपाजिह्वस्य तस्थुषो विरूपा विश्वे पश्यन्ति मायिनः कृतानि॥

युवम्। प्रत्नस्य। साधथः। महः। यत्। दैवी। स्वस्तिः। परि। नः। स्यातम्। गोपाजिह्वस्य। तस्थुषः। विऽरूपा। विश्वे। पश्यन्ति। मायिनः। कृतानि॥

Ashtak » 3 Adhyay » 2 Varga » 24 Mantra » 4

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे राजा और प्रजाजनो ! (युवम्) आप दोनों जैसे (विश्वे) सम्पूर्ण (मायिनः) उत्तम बुद्धिवाले (तस्थुषः) स्थिर पुरुष के (कृतानि) उत्पन्न किये हुए (विरूपा) अनेक प्रकार के रूपों से युक्त पदार्थों को (पश्यन्ति) देखते हैं, वैसे (प्रत्नस्य) प्राचीन (गोपाजिह्वस्य) रक्षा करनेवाली जिह्वावाले पुरुष का (यत्) जो (महः) बड़ी (दैवी) देवताओं की (स्वस्तिः) स्वस्थता अर्थात् शान्ति है उसको (नः) हम लोगों के लिये (परि, साधथः) सब प्रकार सिद्ध करते हैं वैसे सबके सुखकारक हूजिये ॥९॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे बुद्धिमान् शिल्पीजन अनेक प्रकार की वस्तुओं को रचके सबको शोभित करते हैं, वैसे ही राजा आदि जन प्रजा में स्वस्थता को स्थिर करके सबके कार्यों को सिद्ध करें ॥९॥
Subject
अब परस्पर भाव से राज प्रजा विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.