Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 36 / Mantra 10

62 Sukta
11 Mantra
3/36/10
Devata- इन्द्र: Rishi- घोर आङ्गिरसः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ॒स्मे प्र य॑न्धि मघवन्नृजीषि॒न्निन्द्र॑ रा॒यो वि॒श्ववा॑रस्य॒ भूरेः॑। अ॒स्मे श॒तं श॒रदो॑ जी॒वसे॑ धा अ॒स्मे वी॒राञ्छश्व॑त इन्द्र शिप्रिन्॥

अ॒स्मे इति॑ । प्र । य॒न्धि॒ । म॒घ॒ऽव॒न् । ऋ॒जी॒षि॒न् । इन्द्र॑ । रा॒यः । वि॒श्वऽवा॑रस्य । भूरेः॑ । अ॒स्मे इति॑ । श॒तम् । श॒रदः॑ । जी॒वसे॑ । धाः॒ । अ॒स्मे इति॑ । वी॒रान् । शश्व॑तः । इ॒न्द्र॒ । शि॒प्रि॒न् ॥

Mantra without Swara
अस्मे प्र यन्धि मघवन्नृजीषिन्निन्द्र रायो विश्ववारस्य भूरेः। अस्मे शतं शरदो जीवसे धा अस्मे वीराञ्छश्वत इन्द्र शिप्रिन्॥

अस्मे इति। प्र। यन्धि। मघऽवन्। ऋजीषिन्। इन्द्र। रायः। विश्वऽवारस्य। भूरेः। अस्मे इति। शतम्। शरदः। जीवसे। धाः। अस्मे इति। वीरान्। शश्वतः। इन्द्र। शिप्रिन्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 2 Varga » 20 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (शिप्रिन्) सुन्दर नासिका और ठोढ़ीवाले (इन्द्र) सुख के दाता ! आप (अस्मे) हम लोगों के लिये (शश्वतः) निरन्तर वर्त्तमान (वीरान्) पराक्रमी मनुष्यों को धारण करो हे (मघवन्) बहुत सत्कारयुक्त धन से परिपूर्ण (ऋजीषिन्) सरल स्वभाववाले (इन्द्र) सूर्य के सदृश प्रतापी आप (अस्मे) हम लोगों का (विश्ववारस्य) सम्पूर्ण सुख स्वीकार किया जाता है जिससे उस (भूरेः) अनेक प्रकार (रायः) धन के भाग को (प्र, यन्धि) दीजिये (अस्मे) हम लोगों को (जीवसे) जीवने के लिये (शतम्, शरदः) सौ वर्षों को (धाः) धारण कीजिये ॥१०॥
Essence
वे ही उत्तम स्वभाववाले यथार्थवक्ता विद्वान् लोग हैं कि जो लक्ष्मी का विभाग करके अर्थात् अन्य जनों को बाँट के फिर आप भोजन करते हैं और मनुष्यों को ब्रह्मचर्य्य के उपदेश से सौ वर्ष की अवस्थावाले करके सम्पूर्ण कर्मों में उत्साही भयरहित और पुरुषार्थी करते हैं ॥१०॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।