Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 35 / Mantra 7

62 Sukta
11 Mantra
3/35/7
Devata- इन्द्र: Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स्ती॒र्णं ते॑ ब॒र्हिः सु॒त इ॑न्द्र॒ सोमः॑ कृ॒ता धा॒ना अत्त॑वे ते॒ हरि॑भ्याम्। तदो॑कसे पुरु॒शाका॑य॒ वृष्णे॑ म॒रुत्व॑ते॒ तुभ्यं॑ रा॒ता ह॒वींषि॑॥

स्ती॒र्णम् । ते॒ । ब॒र्हिः । सु॒तः । इ॒न्द्र॒ । सोमः॑ । कृ॒ताः । धा॒नाः । अत्त॑वे । ते॒ । हरि॑ऽभ्याम् । तत्ऽओ॑कसे । पु॒रु॒ऽशाका॑य । वृष्णे॑ । म॒रुत्व॑ते । तुभ्य॑म् । रा॒ता । ह॒वींषि॑ ॥

Mantra without Swara
स्तीर्णं ते बर्हिः सुत इन्द्र सोमः कृता धाना अत्तवे ते हरिभ्याम्। तदोकसे पुरुशाकाय वृष्णे मरुत्वते तुभ्यं राता हवींषि॥

स्तीर्णम्। ते। बर्हिः। सुतः। इन्द्र। सोमः। कृताः। धानाः। अत्तवे। ते। हरिऽभ्याम्। तत्ऽओकसे। पुरुऽशाकाय। वृष्णे। मरुत्वते। तुभ्यम्। राता। हवींषि॥

Ashtak » 3 Adhyay » 2 Varga » 18 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) दरिद्रता के नाश करनेवाले ! (ते) आपका (स्तीर्णम्) ढंपा और (बर्हिः) बढ़ा हुआ जल वा (सुतः) उत्पन्न किया गया (सोमः) ऐश्वर्य्य का संयोग वा (कृताः) सिद्ध किये गये (धानाः) पके हुए अन्न विशेष वा (हरिभ्याम्) घोड़ों से संयुक्त वाहन पर बैठे हुए जो (ते) आपके जन और (तदोकसे) वाहनरूप स्थानवाले (पुरुशाकाय) अनेक प्रकार की शक्ति से (वृष्णे) वृष्टि करानेवाले (मरुत्वते) कार्य्य करानेवाले बहुत मनुष्यों के सहित विराजमान (तुभ्यम्) आपके लिये (अत्तवे) भोजन करने को जो (हवींषि) भोजन करने के योग्य अन्न आदि (राता) वर्त्तमान उनको भोगो ॥७॥
Essence
सम्पूर्ण जन उत्तम पदार्थों के भोजन करनेवाले हों और अन्याय से इकट्ठे किये हुए किसी भी पदार्थ का भोग न करैं, इस प्रकार वर्त्ताव करने पर धनसामर्थ्य, विद्या और आयु बढ़ते हैं ॥७॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.