Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 35 / Mantra 5

62 Sukta
11 Mantra
3/35/5
Devata- इन्द्र: Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- स्वराट्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
मा ते॒ हरी॒ वृष॑णा वी॒तपृ॑ष्ठा॒ नि री॑रम॒न्यज॑मानासो अ॒न्ये। अ॒त्याया॑हि॒ शश्व॑तो व॒यं तेऽरं॑ सु॒तेभिः॑ कृणवाम॒ सोमैः॑॥

मा । ते॒ । हरी॒ इति॑ । वृष॑णा । वी॒तऽपृ॑ष्ठा । नि । री॒र॒म॒न् । यज॑मानासः । अ॒न्ये । अ॒ति॒ऽआया॑हि । शश्व॑तः । व॒यम् । ते । अर॑म् । सु॒तेभिः॑ । कृ॒ण॒वा॒म॒ । सोमैः॑ ॥

Mantra without Swara
मा ते हरी वृषणा वीतपृष्ठा नि रीरमन्यजमानासो अन्ये। अत्यायाहि शश्वतो वयं तेऽरं सुतेभिः कृणवाम सोमैः॥

मा। ते। हरी इति। वृषणा। वीतऽपृष्ठा। नि। रीरमन्। यजमानासः। अन्ये। अतिऽआयाहि। शश्वतः। वयम्। ते। अरम्। सुतेभिः। कृणवाम। सोमैः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 2 Varga » 17 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे प्रतापयुक्त पुरुष ! जो (अन्ये) इससे और (यजमानासः) विद्या की सङ्गति के जाननेवाले (ते) आपके (वीतपृष्ठा) चौड़ी पीठों से युक्त (वृषणा) बलिष्ठ (हरी) वाहनों के ले चलनेवालों को (मा) नहीं (नि, रीरमन्) रमायैं उनको आप (अत्यायाहि) बड़े वेग से प्राप्त हूजिये वा छोड़िये और (शश्वतः) अनादि काल से सिद्धविद्या युक्त पुरुषों को प्राप्त हूजिये जिस (ते) आपके (सुतेभिः) उत्पन्न (सोमैः) ऐश्वर्य्यों से (अरम्) पूरे काम को (वयम्) हम लोग (कृणवाम) करें, वह आप हमारे पूरे काम को करो ॥५॥
Essence
जो लोग अग्नि आदि पदार्थों की विद्या को जाने विना इस विद्या के जाननेवाले जनों का उत्साह नहीं बढ़ाते, उनका उल्लङ्घन कर अनादि काल से सिद्ध विद्या के जाननेवाले विद्वानों के शरण जा के शिल्पविद्या से उत्पन्न कार्यों से पूर्ण मनोरथवाले हम लोग होवैं, इस प्रकार इच्छा करके नित्य प्रयत्न करैं ॥५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।