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Rigveda Mandal 3 / Sukta 31 / Mantra 6

62 Sukta
22 Mantra
3/31/6
Devata- इन्द्र: Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः, ऐषीरथीः कुशिको वा Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
वि॒दद्यदी॑ स॒रमा॑ रु॒ग्णमद्रे॒र्महि॒ पाथः॑ पू॒र्व्यं स॒ध्र्य॑क्कः। अग्रं॑ नयत्सु॒पद्यक्ष॑राणा॒मच्छा॒ रवं॑ प्रथ॒मा जा॑न॒ती गा॑त्॥

वि॒दत् । यदि॑ । स॒रमा॑ । रु॒ग्णम् । अद्रेः॑ । महि॑ । पाथः॑ । पू॒र्व्यम् । स॒ध्र्य॑क् । क॒रिति॑ कः । अग्र॑म् । न॒य॒त् । सु॒ऽपदी॑ । अक्ष॑राणाम् । अच्छ॑ । रव॑म् । प्र॒थ॒मा । जा॒न॒ती । गा॒त् ॥

Mantra without Swara
विदद्यदी सरमा रुग्णमद्रेर्महि पाथः पूर्व्यं सध्र्यक्कः। अग्रं नयत्सुपद्यक्षराणामच्छा रवं प्रथमा जानती गात्॥

विदत्। यदि। सरमा। रुग्णम्। अद्रेः। महि। पाथः। पूर्व्यम्। सध्र्यक्। करिति कः। अग्रम्। नयत्। सुऽपदी। अक्षराणाम्। अच्छ। रवम्। प्रथमा। जानती। गात्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 2 Varga » 6 Mantra » 1

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Meaning
हे बुद्धिमती स्त्री ! (यदि) जो (सुपदी) उत्तम पादोंवाली आप (सरमा) चलनेवाले पदार्थों के नापनेवाली हुई (अद्रेः) मेघ के (सध्र्यक्) एक साथ प्रकट (पूर्व्यम्) प्राचीन जनों में किये गये (महि) बड़े (पाथः) अन्न वा जल को (विदत्) प्राप्त होवें (रुग्णम्) रोगों से घिरे हुए को औषध से रोगरहित (कः) करती (अक्षरणाम्) अक्षरों के (अग्रम्) श्रेष्ठ (रवम्) शब्द को (अच्छ) उत्तम प्रकार (नयत्) प्राप्त करती है (प्रथमा) पहिली (जानती) जानती हुई (गात्) प्राप्त होवे तो सम्पूर्ण सुख को प्राप्त होवें ॥६॥
Essence
जो स्त्री बिजुली के सदृश विद्याओं में व्याप्त संस्कार और उपस्कार अर्थात् उद्योग आदि कर्म्मों में चतुर उत्तम रीति से बोलने तथा नम्र स्वभाव रखनेवाली होवे, वह सृष्टि के सदृश सुख देनेवाली होती है ॥६॥
Subject
कौन स्त्री सुख देनेवाली होती है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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