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Rigveda Mandal 3 / Sukta 31 / Mantra 2

62 Sukta
22 Mantra
3/31/2
Devata- इन्द्र: Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः, ऐषीरथीः कुशिको वा Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
न जा॒मये॒ तान्वो॑ रि॒क्थमा॑रैक्च॒कार॒ गर्भं॑ सनि॒तुर्नि॒धान॑म्। यदी॑ मा॒तरो॑ ज॒नय॑न्त॒ वह्नि॑म॒न्यः क॒र्ता सु॒कृतो॑र॒न्य ऋ॒न्धन्॥

न । जा॒मये॑ । तान्वः॑ । रि॒क्थम् । अ॒रै॒क् । च॒कार॑ । गर्भ॑म् । स॒नि॒तुः । नि॒ऽधान॑म् । यदि॑ । मा॒तरः॑ । ज॒नय॑न्त । वह्नि॑म् । अ॒न्यः । क॒र्ता । सु॒ऽकृतोः॑ । अ॒न्यः । ऋ॒न्धन् ॥

Mantra without Swara
न जामये तान्वो रिक्थमारैक्चकार गर्भं सनितुर्निधानम्। यदी मातरो जनयन्त वह्निमन्यः कर्ता सुकृतोरन्य ऋन्धन्॥

न। जामये। तान्वः। रिक्थम्। आरैक्। चकार। गर्भम्। सनितुः। निऽधानम्। यदि। मातरः। जनयन्त। वह्निम्। अन्यः। कर्ता। सुऽकृतोः। अन्यः। ऋन्धन्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 2 Varga » 5 Mantra » 2

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Meaning
हे मनुष्यो ! जो (जामये) जामाता के लिये (तान्वः) सूक्ष्म (रिक्थम्) धन को (न, आरैक्) नहीं देता जिसने (सनितुः) विभागकर्त्ता के (निधानम्) निरन्तर धारण करता है उस (गर्भम्) गर्भ को (चकार) किया (अन्यः) अन्य जन (वह्निम्) पहुँचानेवाले को जैसे वैसे (यदि) जो (अन्यः) अन्य (ऋन्धन्) सिद्ध करता हुआ (सुकृतोः) उत्तम कर्मकारियों का (कर्त्ता) कर्त्ता पुरुष है उसको (मातरः) आदर की करनेवाली (जनयन्त) उत्पन्न करती है ॥२॥
Essence
जैसे माता सन्तानों को उत्पन्न कर उनकी वृद्धि करती है, वैसे ही अग्नि को उत्पन्न करके उसकी वृद्धि करे और वैसे ही प्रत्येक स्त्री सन्तानों की वृद्धि करे ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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