Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 29 / Mantra 8

62 Sukta
16 Mantra
3/29/8
Devata- अग्निः Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
सीद॑ होतः॒ स्व उ॑ लो॒के चि॑कि॒त्वान्त्सा॒दया॑ य॒ज्ञं सु॑कृ॒तस्य॒ योनौ॑। दे॒वा॒वीर्दे॒वान्ह॒विषा॑ यजा॒स्यग्ने॑ बृ॒हद्यज॑माने॒ वयो॑ धाः॥

सीद॑ । हो॒त॒रिति॑ । स्वे । ऊँ॒ इति॑ । लो॒के । चि॒कि॒त्वान् । सा॒दय॑ । य॒ज्ञम् । सु॒ऽकृ॒तस्य॑ । योनौ॑ । दे॒व॒ऽअ॒वीः । दे॒वान् । ह॒विषा॑ । य॒जा॒सि॒ । अग्ने॑ । बृ॒हत् । यज॑माने । वयः॑ । धाः॒ ॥

Mantra without Swara
सीद होतः स्व उ लोके चिकित्वान्त्सादया यज्ञं सुकृतस्य योनौ। देवावीर्देवान्हविषा यजास्यग्ने बृहद्यजमाने वयो धाः॥

सीद। होतरिति। स्वे। ऊँ इति। लोके। चिकित्वान्। सादय। यज्ञम्। सुऽकृतस्य। योनौ। देवऽअवीः। देवान्। हविषा। यजासि। अग्ने। बृहत्। यजमाने। वयः। धाः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 33 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (होतः) सुख देनेवाले (अग्नि) अग्नि के सदृश तेजस्वी पुरुष ! आप (स्वे) अपने (लोके) दर्शन में (सीद) वर्त्तमान हो (चिकित्वान्) ज्ञानयुक्त होकर (सुकृतस्य) पुण्य कर्म के (योनौ) कारण वा स्थान में (यज्ञम्) धर्मसम्बन्धी व्यवहार को (सादय) स्थित करो (देवावीः) विद्वानों की रक्षाकर्त्ता (हविषा) दान से (देवान्) उत्तम गुण वा विद्वान् पुरुषों को (यज्ञासि) यज्ञ करें वा स्वीकार करें (उ) यह तर्क है कि (यजमाने) योग्य धर्मसम्बन्धी व्यवहार के कर्त्ता पुरुष में (बृहत्) बड़े (वयः) जीवन वा धर्म आदि को (धाः) धारण करें ॥८॥
Essence
जैसे अग्निहोत्र आदि वा शिल्प आदि सङ्गति के योग्य व्यवहार में संयुक्त किया गया अग्नि उत्तम गुणों को प्रकट करता है, वैसे ही विद्वान् पुरुष को चाहिये कि धर्मसम्बन्धी कर्मों से युक्त करके उत्तम सुखों को संसार में फैलावें ॥८॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।